नव परिवर्तन लाना होगा

जंग लगे सारे विधान हैं ,
नव परिवर्तन लाना होगा !

शेरों को चिड़िया घर दे दो,
बंदर वन पे राज करेंगे ।
हुदहुद के बच्चों की सेवा,
जब बलशाली बाज करेंगे।
कुछ सियार पट्टों के बल पर,
वन वन हुआ हुआ गायेंगे ,
वन वाराहों के कारण जब ,
निर्वासन गजराज करेंगे ।

फिर सब उल्टा पुल्टा होगा,
उस वन को मुरझाना होगा ।
जंग लगे सारे …………..

कुंद धार की तलवारो से,
युद्ध नही जीते जाते हैं।
जो संघर्ष नही करते वह ,
निज बल जान नही पाते हैं।
मन से भीरु व्यक्तियों का,
यह हाहाकार निर्रथक होगा,
बंदर के खिखियाने भर से
क्या वनराज सहम जाते हैं ?

प्रतिभा की अनदेखी करने –
का फिर मूल्य चुकाना होगा ?
जंग लगे सारे………..

गला दबाकर पटुवक्ता का,
उसे तोतला कर डालोगे !
सत्ता के लालच में पड़कर
हाय भला क्या कर डालोगे?
एक शिखंडी के कारण फिर,
कितने भीषम भूमि गिरेंगे?
अंधनीति में अंधे होकर ,
देश खोखला कर डालोगे

तुष्टिकरण की नीति न छोड़ी ,

तो तुमको पछताना होगा ।

जंग लगे सारे……………….

 

——-©डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।