‘रुक जाना नहीं’: एक शानदार पहल

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
कांटों से चलके मिलेंगे साये बहार के.

1974 की फिल्म इम्तिहान का यह लोकप्रिय गीत बहुत खूबसूरत और प्रेरणादायक है. इसी गीत से प्रेरणा लेकर मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने एक शानदार पहल की है. इस पहल की जरूरत के कुछ ख़ास पहलू.

आजकल इम्तिहानों के दिनों में परीक्षा को बोझ समझने के कारण बच्चे बहुत तनावग्रस्त रहते है. इम्तिहान पहले भी होते थे और बहुत कठिन होते थे, लेकिन छात्रों की तैयारी बहुत अच्छी होती थी, इसलिए उनको तनाव बहुत कम या न के बराबर होता था. हंस-हंसकर वे परीक्षा देने जाते थे, हंसते-हंसते परीक्षा हॉल से बाहर निकलते थे. इम्तिहान के बाद भी वे तनाव-मुक्त होते थे, क्योंकि अधिकतर छात्र पास हो जाते थे, साथ ही प्रतियोगिता बहुत कम होती थी. आजकल प्रतियोगिता बहुत अधिक होने के कारण बच्चों पर अधिक नम्बर लाने का बहुत अधिक प्रेशर होता है, इसलिए वे तनाव में आ जाते हैं और अनुचित कदम उठाने लगते हैं. अभी-अभी समाचार की एक सुर्खी देखी है-

”राजस्थान: परीक्षा परिणाम से डरे छात्र ने बनाई अपने ही अपहरण की योजना”

ऐसे अनुचित कदम उठाने और आत्महत्या करने से रोकने के लिए मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकंडरी (12वीं) परीक्षा में फेल हुए छात्र-छात्राओं के लिए ‘रुक जाना नहीं’ योजना के जरिए पास होने का एक और मौका दिया जाएगा. इस योजना में हाईस्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा में फेल छात्र-छात्राओं के लिए परीक्षा जून 2018 में आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा में शामिल होकर फेल छात्र पास होकर अपना शैक्षणिक वर्ष बचा सकते हैं.

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 12वीं और 10वीं की परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें फेल हुए परीक्षार्थियों के लिए रुक जाना नहीं योजना का लाभ देने की सुविधा का प्रावधान किया गया है. गौरतलब है कि हायर सेकंडरी में एक विषय में पूरक का प्रावधान है और दो या उससे अधिक विषयों में फेल विद्यार्थी को पूरक परीक्षा का लाभ नहीं मिलता. यही नहीं, हाईस्कूल में दो विषयों में पूरक का प्रावधान है. इसके मद्देनजर हायर सेकंडरी परीक्षा में दो या उससे अधिक विषय में असफल विद्यार्थी और हाईस्कूल में तीन या उससे अधिक विषयों में असफल छात्रों का एक शैक्षणिक सत्र बचाने के मकसद से ‘रुक जाना नहीं’ योजना को अमल में लाया गया है.

आशा है इस योजना से छात्रों के तनाव में कमी आएगी और वे अवसादग्रस्त होकर अनुचित कदम उठाने से बच सकेंगे. अंत में छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए एक बार फिर कहते हैं-

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
कांटों से चलके मिलेंगे साये बहार के.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।