एक छोटा-सा करवट पुराण

शीर्षक ”एक छोटा-सा करवट पुराण” आपको कुछ अजीब-सा लग रहा होगा न! हमें भी लग रहा है. हमें यह शीर्षक हमारे एक पाठक राजकुमार कांदु की प्रतिक्रिया से मिला. हमारे ब्लॉग ‘करवट’ में प्रतिक्रिया लिखते हुए बड़ी खूबसूरती से लिखा था-

”आदरणीय बहनजी! वाह! करवट का महिमामंडन आपने क्या खूब किया है? महिमामंडन ही नहीं इसे एक छोटा-सा करवट पुराण भी कहा जा सकता है. इन्हीं सब के बीच प्रकृति के करवट की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा. कहावतों के अनुसार जेठ की दुपहरी तपती है, लेकिन मौसम के असमय करवट ने इसको झुठला दिया है. इंसान तिनका-तिनका कर विकास कर रहा है और विकास के नाम पर अंधाधुन्ध प्रकृति से छेड़छाड़ किये जा रहा है. सालों का विकास प्रकृति के कुछ सेकेण्डों की करवट से नेस्तनाबूद हो जाता है. बहुत सुंदर व सार्थक लेखन के लिए आपका हृदय से धन्यवाद!”
राजकुमार कांदु

राजकुमार भाई, जिंदगी के यह करवट सब जगह दिखाई दे रही है. अब देखिए न! बचपन से ही हम त्रिवेणी संगम के बारे में सुनते आ रहे हैं. यह संगम गंगा-यमुना-सरस्वती नदियों का है. सरस्वती नदी को लुप्त-गुप्त बताया जाता रहा है. अब-

यमुनानगर में फूटी सरस्वती की धारा- 
आदिबद्री के पास जमीन से फूटी सरस्वती की धारा, जिसका पानी बहुत ठंडा और मीठा है. लोगों में यह पानी भरकर घर ले जाने की होड़ मच गई है. है न यह एक नई करवट!

राजधानी के रेस्ट्रॉन्ट-बार में नहीं बजेगा रिकॉर्डेड म्यूजिक
ध्वनि प्रदूषण से परेशान दिल्ली अब जाग्रुक होने जा रही है. राजधानी के रेस्ट्रॉन्ट-बार में नहीं बजेगा रिकॉर्डेड म्यूजिक. दिल्ली सरकार ने रेस्ट्रॉन्ट और बार मालिकों को चेताया है कि वे अपने यहां रिकॉर्डेड गाने या संगीत न बजाएं. रिकॉर्डेड गाने बजाने पर तो उन पर कार्रवाई होगी. वहां प्रफेशनल आर्टिस्ट से सिर्फ इंस्ट्रूमेंट के जरिए ही लाइव म्यूजिक और गायन कराया जा सकता है, वह भी धीमी आवाज में.
मन्दसौर को पीने के पानी की समस्या से मिली निजात-

पीने के पानी की समस्या से निजात मिलना अपने आप में एक महान उपलब्धि है. मन्दसौर के सरपंच ने अपना वादा पूरा कर 4 किलोमीटर पाइप लाइन डाली, पीने के पानी की समस्या से निजात मिली और लोगों ने खुशी में कलशयात्रा निकाली.
ऐक्सिडेंट के बाद फुटबॉल की तरह हवा में उछली वैन लेकिन बच गया ड्राइवर

कार की करवट का यह सच्चा और अनोखा किस्सा है. यूक्रेन में हुए एक सड़क हादसे में एक वैन 2 गाड़ियों से टकराकर किसी फुटबॉल की तरह हवा में उछलते हुए पलट गई, लेकिन इस हादसे में ड्राइवर चमत्कारिक ढंग से बाल-बाल बच गया. हादसा एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो चुका है.

सातवीं बार माउंट एवरेस्ट पर, अपना ही रेकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास

एक साहसी के जज्बे ने करवट ली और अपना ही रेकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास. पश्चिम विहार, दिल्ली के रहने वाले BSF के असिस्टेंट कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तु ने सातवीं बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर एक नया इतिहास रच दिया. इसके साथ ही उन्होंने छठी बार का अपना ही रेकॉर्ड तोड़ दिया.
ओडिशा की गरीबी में पली एक बेटी ने फतह किया माउंट एवरेस्ट-

वाह क्या करवट बदली है? ओडिशा के जयपुर में छोटे से गांव जगदीहा में रहने वालीं स्वर्णलता दलाई ने वह कमाल कर दिखाया है जिसकी हसरत कई लोग देखते हैं. गरीबी में पली-बढ़ी स्वर्णलता ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करके पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन किया है.
जैसलमेर के गांव में है दो-दो पत्नियां रखने का रिवाज

राजस्थान के जैसलमेर में एक गांव ऐसा भी है, जहां दो-दो पत्नियां रखने का रिवाज है. यहां के डेरासर ग्राम पंचायत की रामदेयो की बस्ती नामक गांव में हर दूसरे घर के पुरुषों की दो पत्नियां हैं. इस गांव में यह मान्यता जड़ जमा चुकी है कि दूसरी पत्नी ही बेटे को जन्म दे सकती है. यहां के एक बुजुर्ग ने बताया, ‘दूसरी पत्नी को बेटे की गारंटी के तौर पर देखा जाता है. दो पत्नियां होने के बाद घर एकजुट रहे इसके लिए एक ही रसोई में साथ में खाना पकाया जाता है. वर्तमान में यह परम्परा पुरानी पीढ़ी तक ही सीमित है. नई पीढ़ी में यह ‘रिवाज’ नहीं के बराबर ही है. जमाने ने करवट ले ली है.
कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए 11 साल से नहीं कटाए दाढ़ी और बाल

कर्नाटक में बुधवार को एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली है. कुमारस्वामी का एक ऐसा फैन सामने आया है, जिसने उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने तक बाल और दाढ़ी न कटाने की शपथ ली थी. अब जब कुमारस्वामी एक बार फिर से सीएम बनने जा रहे हैं तो इस फैन ने अपने बाल और दाढ़ी कटाने का फैसला किया है. वाह! क्या गजब करवट है!
एक छोटा-सा करवट पुराण का प्रारम्भ हमारे एक पाठक राजकुमार कांदु की प्रतिक्रिया से हुआ, अब समापन भी हमारे एक और 75 साल के युवा पाठक गुरमैल भमरा की प्रतिक्रिया से हो रहा है-

”लीला बहन, इस ब्लॉग को पढ़कर मुझे अपनी बेटी की पचासवीं बर्थडे पार्टी याद हो आई, जो पिछले हफ्ते ही थी. अपनी शारीरिक समस्या के कारण मैं बहुत सालों से बिटिया के घर गया नहीं था. बच्चों ने मेरे लिये गाड़ी में स्पेशल सीट का बन्दोबस्त किया और मैंने बेटी की पार्टी का बहुत मज़ा लिया. इस में खास बात यह है कि बहुत सालों से बाहर न जाने के कारण मुझे बाहर के वातावरण का पता ही नहीं था. दिन बहुत अच्छा था और घर से चले तो हाई वे पर दोनों तरफ़ इतने घने वृक्ष थे और इन वृक्षों के पीछे बड़े-बड़े फार्म, जिन के इर्द-गिर्द वृक्ष-ही-वृक्ष थे. तीन घंटे की ड्राइव थी और यह तीन घंटे मैं रोड के दोनों तरफ़ ही देखता रहा. कहीं भी वृक्षों के बीच गैप नहीं था. घास और वृक्ष ही दिखाई देते थे. दूर-दूर तक हरियाली-ही-हरियाली दिखाई देती थी. यूं तो मैं इस हरियाली के बारे में पहले से ही जानता था, लेकिन इतने वर्षों बाद बाहर जाने से इंग्लैंड का यह वातावरण स्वर्ग समान महसूस हुआ. आज मैं सोचता हूं, कि यही स्वर्ग मैंने अपने बचपन में अपने गांव में ही देखा था, जब हर तरफ़ वृक्ष ही वृक्ष दिखाई देते थे. आज भारत रेगिस्तान जैसा हो रहा है. हम भारतीयों को कब समझ आयेगी की हम नेचर की ओर से बेमुख होते जा रहे हैं और क्या लिखूं/ आप ने इस ब्लॉग में सब लिख दिया है.”

आपने देखा कि हमारे दोनों पाठकों को प्रकृति की सकारात्मक करवट की चिंता है. जब तक हमारे पाठक ऐसी प्रतिक्रियाएं देते रहेंगेऔर आप-हम इसी तरह के आलेख लिखकर खुद को और बाकी सब लोगों को जागरुक करते रहेंगे, प्रकृति की सकारात्मक करवट की चिंता करते रहेंगे, तब तक हम अपने देश की सुख-समृद्धि की ओर से आश्वस्त रह सकते हैं.

फिलहाल इति एक छोटा-सा करवट पुराणम समाप्तम.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।