बाल कविता – चिड़ियों ने कहा कान में

यह कविता 2004 में लिखा था- आज जब इसे पढ़ता हूँ तो बहुत कमियां दिखाती है, लगता है जो कहना चाहता था वो कह नहीं पाय कभी मन करता है की इसमें सुधर करूँ पर फिर विचार आता है इसे ऐसे ही रहने दूं इसे देखकर बीते दिन बखूबी याद आते रहेंगे

चिड़ियों ने चहचहा के,
कुछ ऐसे कहा कान में,
तिमिर को खेदता हुवा,
कोई आ रहा संसार में,
जिसकी उज्ज्वल प्रभा को देखने,
की मन में इच्छा छाई,
उस उज्ज्वल प्रभा को देखकर,
टूटेगी किसी की तन्हाई,
गृहणियाँ अब जाग गयी,
करना शुरू किया नित्यकर्म,
पशुओं को हौज लगाकर,
कोई बैठा ग्वाल कुवंर,
तुम जैसे विद्यार्थी जगकर,
कर रहे विद्या ग्रहण,
सूर्य लालिमा आने वाली,
लेकर एक उजला दिन,
तू भी जग जा ओ सलोने,
अब तो होने वाली सुबह।।

।।प्रदीप कुमार तिवारी।।
करौंदी कला, सुलतानपुर
7978869045

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

नाम - प्रदीप कुमार तिवारी। पिता का नाम - श्री दिनेश कुमार तिवारी। माता का नाम - श्रीमती आशा देवी। शिक्षा - संस्कृत से एम ए। जन्म स्थान - दलापुर, इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश। मूल निवासी - करौंदी कला, शुकुलपुर, कादीपुर, सुलतानपुर, उत्तर-प्रदेश। इलाहाबाद मे जन्म हुआ, प्रारम्भिक जीवन नानी के साथ बीता, दसवीं से अपने घर करौंदी कला आ गया, पण्डित श्रीपति मिश्रा महाविद्यालय से स्नातक और संत तुलसीदास महाविद्यालय बरवारीपुर से स्नत्कोतर की शिक्षा प्राप्त की, बचपन से ही साहित्य के प्रति विशेष लगव रहा है। समाज के सभी पहलू पर लिखने की बराबर कोशिस की है। पर देश प्रेम मेरा प्रिय विषय है मैं बेधड़क अपने विचार व्यक्त करता हूं- *शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा।।* और भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार साझा करता हूं- *मैं शब्दों से अंगार उड़ाने निकला हूं, जन जन में एहसास जगाने निकला हूं। लूटने वालों को हम उठा-उठा कर पटकें, कर सकते सब ऐसा विश्वास जगाने निकला हूं।।*