कुंडली – गर्मी में

मनवां अइसा बावरा, पल-पल भरे कुलेल
खेल रहा है आजकल, जियरा के सँग खेल
जियरा के सँग खेल, भावनाओं की मंडी
नैना खुद को समझे, दादा कागभुसुंडी
कह सुरेश धक-धक दिल बोले कटे न दिनवां
गर्मी में बाबू सठियाइ गयो है मनवां ।।
सुरेश मिश्र

परिचय - सुरेश मिश्र

हास्य कवि