Monthly Archives: June 2018

  • सत्यार्थ प्रकाश क्यों पढ़े?

    ओ३म् अच्छी ज्ञानवर्धक पुस्तकें सभी मनुष्यों को पढ़नी चाहियें। अनेक पुस्तकों को धार्मिक ग्रन्थों की संज्ञा दी जाती है। धार्मिक का अर्थ होता है जिसमें धर्म के विषय में जानकारी दी गई हो। धर्म शब्द संस्कृत...


  • सिकुलर सोच 

    सिकुलर सोच 

    इण्डिया के सभी सिकुलर खामोश थे बिलकुल बापू की माफिक… बापू के देस में ५६ कारसेवक जाहिर है… हे राम ! को मानने वाले हिन्दू ! ट्रेन के डिब्बों में जला कर मार डाले ! हिन्दू...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला । याद आएगा बहुत रूठ के जाने वाला ।। जाने कैसा है हुनर ज़ख्म नया देता है । खूब शातिर है कोई तीर चलाने वाला ।। उम्र पे ढल...

  • कुंडलियाँ….

    कुंडलियाँ….

    आँगन मन  इठला रहा, एक अधखिला फूल। घात अमित्र सम वात की, चुभा गयी थी शूल। चुभा गयी थी शूल, फूल मुरझाया ऐसे। यत्न वृथा सब आज, खिला न पहले जैसे। “अनहद” महत विषाद, लगे ये...

  • फिश-सेलफिश

    फिश-सेलफिश

    व्यंग्य कविता एक बेबी फिश ने  ममी फिश से पूछी एक बात बोली, ”ममी, एक छोटी-सी है मेरी तहकीकात आप दिन-रात मुझे पानी में ही घुमाती-फिराती हो कभी जमीन पर क्यों नहीं ले जाती हो? क्या...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    अस्त-व्यस्त गिरने लगी, पहली बारिश बूँद। मानों कहना चाहती, मत सो आँखें मूँद। अभी वक्त है जाग जा, मेरे चतुर सुजान- जेठ असाढ़ी सावनी, भादों जमे फफूँद॥-1 याद रखना हर घड़ी उस यार का। जिसने दिया...


  • आखिरी कहानी (भाग 4/5)

    आखिरी कहानी (भाग 4/5)

    अध्याय 4 – औघड़ बाबा निरंजन का संकलन लगभग-लगभग पूरा हो गया था। उसे अपनी आखिरी कहानी की जितनी ही शिद्दत से तलाश थी, उतनी ही वह उससे दूर जा रही थी। काफी खोजने के बाद...