धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सत्यार्थ प्रकाश क्यों पढ़े?

ओ३म् अच्छी ज्ञानवर्धक पुस्तकें सभी मनुष्यों को पढ़नी चाहियें। अनेक पुस्तकों को धार्मिक ग्रन्थों की संज्ञा दी जाती है। धार्मिक का अर्थ होता है जिसमें धर्म के विषय में जानकारी दी गई हो। धर्म शब्द संस्कृत का शब्द है। हमारे विचार से यह न उर्दू में, न अरबी में, न अंग्रेजी में और न विश्व […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सृष्टि रचना, उसका पालन एवं सृष्टि की अपौरुषेय रचनाएँ ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण

ओ३म् हम संसार में अनेक रचनायें देखते हैं। रचनायें दो प्रकार की होती हैं। एक पौरुषेय और दूसरी अपौरुषेय। पौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिन्हें मनुष्य बना सकते हैं। हम भोजन में रोटी का सेवन करते हैं। यह रोटी आटे से बनती है। इसे मनुष्य अर्थात् स्त्री वा पुरुष बनाते हैं। मनुष्य द्वारा बनने से […]

राजनीति

सिकुलर सोच 

इण्डिया के सभी सिकुलर खामोश थे बिलकुल बापू की माफिक… बापू के देस में ५६ कारसेवक जाहिर है… हे राम ! को मानने वाले हिन्दू ! ट्रेन के डिब्बों में जला कर मार डाले ! हिन्दू ने तो जलना ही था जिन्दा जले या मुर्दा क्या फर्क पड़ता है ! सभी सिकुलर भी इसी लिए […]

गीतिका/ग़ज़ल

आपको तो दिल जलाना आ गया

जख्म देकर मुस्कुराना आ गया । आपको तो दिल जलाना आ गया ।। क़ाफिरों की ख़्वाहिशें तो देखिये । मस्ज़िदों में सर झुकाना आ गया ।। दे गयी बस इल्म इतना मुफ़लिसी । दोस्तों को आज़माना आ गया ।। एक आवारा सा बादल देखकर । आज मौसम आशिक़ाना आ गया ।। क्या उन्हें तन्हाइयां डसने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला । याद आएगा बहुत रूठ के जाने वाला ।। जाने कैसा है हुनर ज़ख्म नया देता है । खूब शातिर है कोई तीर चलाने वाला ।। उम्र पे ढल ही गयी मैकशी की बेताबी । अब तो मिलता ही नहीं पीने पिलाने वाला ।। अब मुहब्बत पे यकीं […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ….

आँगन मन  इठला रहा, एक अधखिला फूल। घात अमित्र सम वात की, चुभा गयी थी शूल। चुभा गयी थी शूल, फूल मुरझाया ऐसे। यत्न वृथा सब आज, खिला न पहले जैसे। “अनहद” महत विषाद, लगे ये सूना कानन। मुरझाया था फूल, चहकता कैसे आँगन। ……अनहद गुंजन

कविता

फिश-सेलफिश

व्यंग्य कविता एक बेबी फिश ने  ममी फिश से पूछी एक बात बोली, ”ममी, एक छोटी-सी है मेरी तहकीकात आप दिन-रात मुझे पानी में ही घुमाती-फिराती हो कभी जमीन पर क्यों नहीं ले जाती हो? क्या जमीन पर रहने की नहीं है हमारी औकात?” ममी फिश प्यार से बोली, ”तुम्हारा इरादा है नेक लेकिन  हमारे […]

मुक्तक/दोहा

“मुक्तक”

अस्त-व्यस्त गिरने लगी, पहली बारिश बूँद। मानों कहना चाहती, मत सो आँखें मूँद। अभी वक्त है जाग जा, मेरे चतुर सुजान- जेठ असाढ़ी सावनी, भादों जमे फफूँद॥-1 याद रखना हर घड़ी उस यार का। जिसने दिया जीवन तुम्हें है प्यार का। हर घड़ी आँखें बिछाए तकती रहती- है माँ बहन बेटी न भार्या पारका॥-2 (पारका-पराया) […]

सामाजिक

सवाल देश के युवाओं के भविष्य का है।

65 फ़ीसद आबादी युवाओं की। युवाओं का ज़िक्र सियासतदां करते भी हैं। फ़िर देश के युवाओं का हाल बेहाल क्यों है। युवाओं की जरूरत आख़िर क्या हो सकती है। इससे अनभिज्ञ तो शायद कोई नहीं। पहली प्राथमिकता बेहतर शिक्षा की। उसके बाद रोजगार की। क्या आज के परिवेश में युवाओं की ये दोनों जरूरतें पूरी […]

कहानी

आखिरी कहानी (भाग 4/5)

अध्याय 4 – औघड़ बाबा निरंजन का संकलन लगभग-लगभग पूरा हो गया था। उसे अपनी आखिरी कहानी की जितनी ही शिद्दत से तलाश थी, उतनी ही वह उससे दूर जा रही थी। काफी खोजने के बाद भी उसे कोई ऐसा सिरा नहीं मिल रहा था जिसे पकड़कर वह अपनी आखिरी कहानी तक पहुँच सके। वह […]