वर्ल्ड मिल्क डे: बचपन की यादें

आज वर्ल्ड मिल्क डे है. वर्ल्ड मिल्क डे हमें अपने बचपन में ले गया. बचपन में हमें अपनी मातृभाषा सिंधी की एक छोटी-सी कविता, जिसे हम हम बालगीत या शिशुगीत भी कह सकते हैं और लोकगीत भी घर में भी सिखाया गया था और स्कूल में भी. यह गीत इस तरह है-

जो खीरु (दूध) पिए,
सो वीरु थिए,
डं॒द (दांत) ज़ोरु वठनि,
डा॒ढा (बहुत) सुहिणा लग॒नि,
अखियुनि जोति वधे,
डा॒ढी सूंहं थिये,
वठे जोरु बदनु,
लिङ (शरीर के अंग) चुस्तु थियनि,
डे॒ खीरु अम्मा,
पी पढ़ण वञा.

सरल अर्थ-
मां- जो दूध पीता है, वह वीर यानी ताकतवर होता है. उसके दांत मजबूत होते हैं और बहुत सुंदर लगते हैं. दूध पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती हैं और आंखें खूबसूरत लगती हैं. शरीर शक्तिशाली होता है और शरीर के अंग चुस्त और फ़ुर्त होते हैं.
बच्चा- हे मां, मुझे दूध दो, ताकि मैं पीकर पढ़ने जाऊं.
कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशियम, फॉसफॉरस, विटमिन बी12 जैसे कई पोषक तत्वों से भरपूर दूध सेहत के लिए फायदेमंद है इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन दूध से जुड़े कई मिथक भी हैं, जिन्हें खत्म किया जाना चाहिए. साथ ही, हमें यह भी पता होना चाहिए कि किस उम्र में कितना दूध पीना हमारे लिए जरूरी है.

रेग्युलर रूप से भरपूर मात्रा में दूध पीने से उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों को होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है. दूध में मौजूद फॉस्फॉरस कैल्शियम को सोखने और हड्डियों को बचाए रखने में मदद करता है.

अडल्ट्स को फुल क्रीम की बजाय टोंड या स्किम्ड मिल्क पीना चाहिए क्योंकि इससे फालतू कैलरी खाने से बच जाते हैं.

जरूरत से ज्यादा दूध पीने से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. कैल्शियम आयरन सोखने के प्रॉसेस में रुकावट डालता है। बच्चे अगर दूध ज्यादा पीते हैं तो उनका वजन कम रह जाता है, क्योंकि दूध से पेट भरने के बाद वे पूरा खाना नहीं खाते. प्रोटीन रिच होने के कारण भूख भी कम लगती है.

दूध ही कैल्शियम का इकलौता और बेस्ट सोर्स नहीं है. असलियत यह है कि गाय के दूध में मौजूद कैल्शियम को हमारा शरीर बमुश्किल ही सोख पाता है. हरी सब्जियां जैसे कि पालक, ब्रोकली, साग, सोयाबीन आदि में काफी अच्छी मात्रा में कैल्शियम होता है.

दूध उत्‍पादन में दुनि‍या से 3 गुना तेज है भारत की रफ्तार, लेकिन चारा और पानी बड़ी हुई चुनौती हैं.
आपको भी दूध से जुड़ी हुई बचपन के कुछ गीत या यादें हों, कामेंट्स में अवश्य लिखिएगा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।