बहुत -सा काम बंदों का स्वयं भगवान करता है

बहुत -सा काम बंदों का स्वयं भगवान करता है
मगर तारीफ़ अपनें मुॅह से हर नादान करता है ।

बडे लोगों की बातें भी बड़ी होतीं , वो तुम जानो
सरल बातें तो बस कोई सरल इन्सान करता है ।

उसी को मानते अपना , उसी की कद्र करते हैं
हमारी मुश्किलें जो आदमी आसान करता है ।

मेरे इस प्रश्न का उत्तर अभी तक मिल नहीं पाया
अधूरे ज्ञान पर विज्ञान क्यों अभिमान करता है ।

उसी के सामने केवल हम अपना सर झुकाते हैं
ग़रीबों और मज़लूमों का जो सम्मान करता है ।

नयी सरकार आये पर करे वह काम भी अच्छा
यही तो सोचकर इक नागरिक मतदान करता है ।

हजा़रों बार परखा है तभी दावे से कहता हूँ
मुसीबत में मेरी रक्षा मेरा ईमान करता है ।

 

परिचय - डॉ डी. एम. मिश्र

उ0प्र0 के सुलतानपुर जनपद के एक छोटे से गाँव मरखापुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्म । शिक्षा -पीएच डी ,ज्‍योतिषरत्‍न। गाजियाबाद के एक पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में कुछ समय तक अघ्यापन । पुनश्च बैंक में सेवा और वरिष्ठ -प्रबंघक के पद से कार्यमुक्त । विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में 400 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित और कई बार आकाशवाणी व दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण । ‘इज्जतपुरम्’ , ‘उजाले का सफर’ , ‘ रोशनी का कारवॉ ’ , ‘यह भी एक रास्ता है’ सहित आठ काव्य- कृतियाँ प्रकाशित । ‘‘ आईना - दर - आईना ’’ , गजल संग्रह शीघ्र प्रकाश्य ।कई साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं से पुरस्कृत । अवधी अकादमी का ‘ ‘जायसी पंचशती सम्मान’ , भारत - भारती का ‘ लोकरत्न सम्मान’ , राष्ट्रीय साहित्य पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘ भारती -भूषण सम्मान ’ , प्रेमा देवी त्रिभुवन अग्रहरि मेमोरियल ट्रस्ट अमेठी द्वारा प्रशस्ति पत्र , , दीपशिखा सम्मान , रश्मिरथी सम्मान आादि ! सम्पर्क:604, सिविल लाइन, निकट राणा प्रताप पी0जी0 कालेज सुलतानपुर-228001 मो0 9415074318