श्रृंगार धरती का !!!!

हरियाली ये
श्रृंगार धरती का
उजाड़ो मत !
….
हैं वरदान
धरा में पेड़ पौधे
बचा लो इन्हें !

बो देना बीज
धरा की गोद सूनी
प्रकृति कहे !
….
खुद तपते
शीतल छाँव देते
हमें वृक्ष ये!

कड़वी नीम
मीठी निम्बोली देती
शीतल छाँव !
….
कुल्हाड़ी मार
गिराया जो पेड़ को
चीखी थीं जड़ें !

परिचय - सीमा सिंघल 'सदा'

जन्म स्थान :* रीवा (मध्यप्रदेश) *शिक्षा :* एम.ए. (राजनीति शास्त्र) *लेखन : *आकाशवाणी रीवा से प्रसारण तो कभी पत्र-पत्रिकाओ में प्रकाशित होते हुए मेरी कवितायेँ आप तक पहुँचती रहीं..सन 2009 से ब्लॉग जगत में ‘सदा’ के नाम से सक्रिय । *काव्य संग्रह : अर्पिता साझा काव्य संकलन, अनुगूंज, शब्दों के अरण्य में, हमारा शहर, बालार्क . *मेरी कलम : सन्नाटा बोलता है जब शब्द जन्म लेते हैं कुछ शब्द उतरते हैं उंगलियों का सहारा लेकर कागज़ की कश्ती में नन्हें कदमों से 'सदा' के लिए ... ब्लॉग : http://sadalikhna.blogspot.in/ ई-मेल : sssinghals@gmail.com