खब्बू की शादी

लीजिए साहब, आखिर खब्बू की शादी हो ही गई. हमारे खब्बू साहब को खब्बू क्यों कहा जाता है, यह तो पता नहीं, लेकिन पहले हम आपको खब्बू के बारे में ही कुछ जानकारी देते हैं.

बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों को खब्बू कहा जाता है. बाएं हाथ से ज्यादा काम करने वाले लोगों को दाहिने हाथ वालों की दुनिया में कुछ मुश्किलें तो आती हैं, पर बदले में प्रकृति ने उन्हें कुछ खूबियां भी बख्शी हैं.

माना जाता है कि खब्बू अपने दोनों पैरों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका सबसे अच्छा उदहारण हैं, महानतम फुटबॉलर पेले जोकि लेफ्टी हैं.

बाएं हाथ से काम करने वाले लोग चित्रकारी करते हैं, तो आमतौर पर दाहिनी और देखने वाले चेहरे बनाते हैं.

बाएं हाथ से काम करने वाली महिलाएं एक साथ कई काम बखूबी कर सकती हैं. घर-परिवार में स्त्रियां वैसे भी कई काम संभालती हैं. ऐसे में उनका दिमाग दोनों हाथों को ठीक से सन्देश भेजता है. खब्बुओं के दिमाग के दोनों हिस्सों में बेहतर तालमेल उन्हें अतिरिक्त लाभ देता है.

अब बात हमारे ब्लॉग के नायक खब्बू साहब की. इनका नाम है इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू . खब्बू फैजाबाद जिला के गोसाईगंज क्षेत्र के विधायक हैं. खब्बू की शादी का श्रेय जनता को जाता है.

हुआ यों, कि नेताजी ने चुनाव में प्रचार के दौरान कहा कि आप हमें वोट देकर जिताएं तभी हम शादी करेंगे और हुआ भी यही. जनता ने नेताजी को जिताया और विधायक बना दिया. इसके बाद उन्होंने भी अपना वादा पूरा करते हुए शादी रचा ली.

खब्बू जी ने शादी के बाद एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया जिसमें सत्तादल से लेकर विपक्ष तक के कई विधायक और मंत्रियों ने शिरकत की. समारोह में शामिल हुए लोगों ने दावा किया कि भीड़ की संख्या लाखों में थी इसलिए गांव में लगभग 30 बीघा के क्षेत्रफल में पांच बड़े पंडाल लगाए गए थे. समारोह में शामिल होने वाले लोगों को लजीज व्यंजन खाने को मिलें, इसके लिए हर तरह के इंतजाम किए गए थे. करीब ढाई सौ कारीगरों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों से बुलाया गया था. इनके साथ सहयोग में 1200 वेटर भी लगे थे. देसी पकवान के साथ-साथ दक्षिण भारतीय व्यंजन भी अतिथियों को परोसे गए.

खब्बू की शादी में एक विचित्र संगठन व मेल के दर्शन हुए. पक्ष-विपक्ष के अनेक वर्तमान सांसदों के अतिरिक्त अनेक पूर्व सांसदों के साथ-साथ दर्जनों की संख्या में साधु- संतों की भी मौजूदगी भी रही.

भारी भीड़ को नियंत्रित करने व उनकी सुरक्षा के लिए करीब 1000 पुलिसकर्मियों को लगाया गया था. पुलिस ने दोपहर 12 बजे से ही रूट डायवर्जन की कमाल संभाल ली थी, जिसकी मॉनिटरिंग जिले के सभी आला-अधिकारी कर रहे थे. शाम होते- होते जिले भर के सभी आला अधिकारियों की मौजूदगी पंडाल में थी.

इसी के साथ समाप्त हुआ खब्बू की शादी का भव्य रिसेप्शन. सचमुच खब्बू की शादी का श्रेय जनता को ही जाता है और खब्बू साहब ने भी शादी करके अपना वादा बखूबी बिखाया. किसी की शादी के लिए जनता को इतना बेकरार शायद ही कभी देखा गया हो. यह समन्वय चलता ही रहे, तो अच्छा है. नेता और सांसदों का समन्वय होने से त्वरित विकास संभव होता है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।