लघुकथा

लव यू पापा

“पापा..प्लीज साइन कर दो न फॉर्म पर..” नीति लगभग रुआंसी सी बोली। “कहा न..विदेश से पढ़ाई की अनुमति नहीं दे सकता बेटा..जमाना देख रही हो न?”

पापा की बात सुनकर नीति औंधे मुंह अपने पलंग पर लेट गई ।नीति की माँ ने पापा को बुलाकर धीमे से कहा “हर तरफ खतरा है तो क्या जीना छोड़ देते हैं?”और किचन में चली गईं ।

कुछ देर बाद नीति के पापा अपने हाथ से कॉफी बनाकर लाए और नीति से बोले..”बिटिया रानी लो पापा के हाथ की कॉफी पी लो..।” लेकिन नीति ने तकिए से मुंह नहीं निकाला।पापा कॉफी वहीं रखकर चले गए।

अचानक नीति का फोन ,जो बगल की टेबल पर रखा था बज उठा।नीति अनमने मन से उठी ..बिना देखे फोन उठाकर बोली”..हैलो”उधर से पापा की आवाज आई जो बरामदे में बैठकर फोन कर रहे थे..”उठ गई बिट्टो ..चलो अब कॉफी पी लो।”अनमनी नीति ने झुंझलाहट के साथ फोन काट दिया और जैसे ही टेबल पर रखी कॉफी को उठाने चली ..फॉर्म पर नजर पड़ी। पापा साइन कर चुके थे।

नीति के सपनों को पंख लग गए ।उत्साहित नीति बरामदे की तरफ दौड़ते हुए खुशी से चीखी..”लव यू पापा”

अंकिता

अंकिता कुलश्रेष्ठ

नाम:अंकिता कुलश्रेष्ठ पिता जी : श्री कामता प्रसाद कुलश्रेष्ठ माता जी: श्रीमती नीरेश कुलश्रेष्ठ शिक्षा : परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी निवास स्थान : आगरा पता: ग्राम व पोस्ट सैयां तहसील खेरागढ़ जिला आगरा उत्तरप्रदेश