कविता

जब जब दिल बेकरार होता है!

जब जब दिल बेकरार होता है ,
कैसे कहें क्या हाल दिल का होता है !
तुम रुठ जाते हो जब जब हमसे ,
नैनो को अश्कों से जाने कौन भिगोता है!
प्यार का मौसम न जाए कभी भी ,
इंतजार में प्रियतम की कौन फिर सोता है!
फूलों ने सीख लिया बिन मौसम भी खिलना,
माली खुशी खुशी प्यार के बीज बोता है!
अजब सी कशिश है इस प्यार की गर सोचो,
इक अजनबी के लिए कौन ऐसे रोता है !
जब जब दिल बेकरार होता है,
प्यार को पाने का नहीं, डर खोने का होता है!
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |