ख्यालात

उलझे उलझे से ख्यालात
कर जाते हैं बैचैन मुझे ,
खुश रहने की जिद में
और भी उलझ गयी जिंदगी ।
बहके बहके से जज्बात
रुलाते हैं मुझे ,
रुत प्यार की पतझड़
बना गयी जिंदगी ।
टूट कर बिखर न जाए
शीशे जैसा दिल ,
मना ले मुझे बहुत नाराज हूँ
खुद से ऐ मेरी बोझिल सी
तन्हा जिंदगी।
एक दिन चली जाऊंगी सबसे दूर ,
डोर हूँ पतंग की नाजुक सी ।
अब और न रुला मुझे
ओ मेरी हमदर्द जिंदगी ।

वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन