जज्बात

जज्बातों में भीगा हुआ कुछ तन्हा सा मुकाम था
कुछ लफ्ज थे उलझे हुए कुछ तन्हाई का पैगाम था

समझाया था दिल ने मेरे छोड़ दे उम्मीद किसी से
न माना था ये दिल मेरा गहराई का अहतराम था ।

हर पल रोये हम तेरे लिए क्यों दौर ये तन्हाई का है ,
आजा सनम रो रहा दिल रहनुमाई ही अंजाम था ।

बेबफाई तेरी न मार दे सिसकते हुए अरमान को ,
चिंता बन गयी अब चिता सनम इंतजार बेनाम था ।

सिसक रहे हैं अल्फाज भी जख्मी कागज हुआ

बिखर गई स्याही भी यही तो इश्क़ का इनाम था ।

वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन