बेहद बैचेन हैं समाजवादी और खुलती जा रही पोल

अखिलेश यादव के सरकारी बंगले का मामला अब बेहद संगीन हो गया है क्योंकि यह प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक तक पहुंच चुका है तथा उन्होंने मीडिया व सोशल मीडिया में चल रही बहसों व खबरों को स्वयं संज्ञान में लेते हुए इसे एक बेहद गंभीर मामला बताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में अखिलेश यादव के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की बात कही है। अब यह मामला मुख्यमंत्री के दरबार में नये सिरे से पहुंच गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यपाल के पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समाजवादी नेता के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं। अखिलेश ने सरकारी बंगले में जिस प्रकार से तोड़-फोड़ की वह सोशल मीडिया में जबर्दस्त चर्चा का विषय बना हुआ है तथा अब राज्यपाल के पत्र के बाद सपा नेता की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं।
यह प्रदेश की राजनीति में पहली बार होने जा रहा है कि राज्यपाल ने किसी पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्यवाही के लिए इस प्रकार से कड़ा पत्र लिखा हो। यह प्रकरण जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे राजनीति भी आगे बढ़ेगी। सरकारी बंगले के प्रकरण में समाजवादी नेता की छवि कम से कम काफी धूमिल हो चुकी है। अब देखना है कि और क्या होने वाला है। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से पहले राज्य संपत्ति विभाग के अफसरों से पूरी जानकारी ली है। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि राज्य संपत्ति को क्षति पहुंचाने के विरूद्ध राज्य सरकार द्वारा विधि के अनुसार कार्यवाही की जाये। यही कारण है कि अब समाजवादी बहुत अधिक बैचेन हो जायेंगे तथा रातभर उन्हें नींद नहीं आयेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों व प्रदेश में योगी सरकार के कड़े तेवरों के बाद अपना एहसान जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना सरकारी बंगला खाली तो कर दिया, लेकिन उसके बाद अखिलेश यादव जिस प्रकार से अपनी प्रतिक्रिया लगातार दे रहे हैं उससे साफ पता चल रहा है कि वह अंदर ही अंदर किसी बात को लेकर बहुत अधिक बैचेन हो उठे हैं तथा वह अपनी खुन्नस निकालने की गफलत में जनमानस के बीच अपनी छवि को ही लगातार खराब करते जा रहे हैं।
समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव ने काफी एहसान जताते हुए सरकारी बंगला खाली तो कर दिया, लेकिन उसके बाद बंगले के अंदर की जो तस्वीरें सामने आयी है। वह पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान को ही लगातार ठेस पहंुचा रही हैं तथा उसके बाद वह जिस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं उससे साफ पता चल रहा है कि सरकारी बंगले को उन्होंने अपना बेहद निजी मकान समझ लिया था और मीडिया व प्रदेश की जनता के समक्ष वह ऐसा चेहरा बना रहे हैं कि जैसे मोदी और योगी जी की जोड़ी ने उनका सबकुछ लूट लिया है और यहां तक कि उन्हें उनके अपने ही घर से बेदखल कर दिया है। सरकारी सम्पति को अपना समझ लेना यही समाजवाद है। यदि आज डा. राममनोहर लोहिया जैसे समाजवादी जीवित होते तो अपना सिर पकड़कर रो रहे होते।
सरकारी बंगले को खाली करते समय उनके लोगों ने बंगले में टोटियां और सिंक तक नहीं छोडे़ हैं। घर के अंदर के जो हालात सामने आ रहे है उससे पता चल रहा है कि उनके बच्चों ने सरकारी बंगले का उपयोग एकदम व्यक्तिगत घर की तरह किया था। बंगले की दीवारों पर पेंटिंग कर रखी थी जिसमें एक पेटिंग में बच्चों ने दो पेड़ बना रखे थे जिसमें एक पेड़ हरा भरा था औेर दूसरा सूखा था लगभग वैसा ही हाल अब समाजवादियों का हो रहा है।
अखिलेश यादव सरकारी बंगले के प्रति इतने अधिक बैचेन हो रहे हैं कि अब वह सरकारी अफसरों पर ही बयान देने लगे हैं। उनका कहना है कि जो अधिकारी उनके सामने कप प्लेट उठाकर लाते थे वह अब अपने नये हाईकमान को खुश करने के लिए यह सब करवा रहे हैं। साथ ही कह रहे हैं कि इन अधिकारियों को समझना चाहिये कि लोकतंत्र में सरकारें तो आती जाती रहती है। इस प्रकार की बातें करके पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक प्रकार से अधिकारियों को डरा भी रहे है तथा उनका कुछ संकेत भी दे रहे हैं।
अखिलेश यादव कह रहे हैं कि भाजपा सरकार पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है। चारों तरफ भ्रष्टाचार और अपराध का बोलबाला है इसलिए प्रदेश में बढ़ रही जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए मेरी छवि को खराब करने के लिए बीजेपी ने यह साजिश रची है। वे बीजेपी को हराने के लिये इतने अधिक बैचेन हो रहे हैं कि बसपा सुप्रीमो मायावती के समक्ष अभी से नतमस्तक हो रहे हैं तथा अभी से बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने की बात करने लगे हैं। उन्होंने बसपा को अभी से 40 सीटों का आफर दे दिया है। अखिलेश और समाजवादी कुनबा बहुत बैचेन है। अब उनके खिलाफ कई घोटालों की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
सोशल मीडिया में समाजवादी लगातार ट्रोल हो रहे हैं। सपा के पूराने नेता अमर सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश यादव से जो सवाल पूछे हैं वह वाकई बेहद गंभीर किस्म के हैं। अमर सिंह ने ट्विटर पर वीडियो जारी करके अखिलेश यादव को बेहद घटिया और बेहूदा आदमी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश ने अपने धन से बंगला बनवाया तो वह बतायें कि इतना पैसा कमाया कहां से और इसका टैक्स दिया है कि नहीं। उन्होंने कहा कि अखिलेश को यह जवाब तो देना ही चाहिए कि बंगले में लगे सौ-सौ एसी, इटालियन टाइल्स और स्विमिंग पूल उनके खर्च पर बना था या फिर राजस्व विभाग के बजट से? अमर सिंह ने सवाल किया कि आप समाजवादी है, पूंजीवादी है या फिर अवसरवादी या फिर कथित दुष्कर्मी व अवैध खनन से धन कमाने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति के सहयोग से अपने जीवन को बेहतर बनाने वाले व्यक्ति हैं। अगर यह सब आपके पैसे से था तो जनता को हिसाब दीजिए कि यह पैसा आपने कहां से कमाया। अगर यह सब सरकार का था तो आपको दुरूपयोग करने का क्या अधिकार है?
आज की तारीख में सोशल मीडिया में अखिलेश यादव की खूब जमकर आलोचना हो रही है यही कारण है कि वह बेहद बैचेन हो उठे हैं। उन्होंने सरकारी बंगले का जो हाल करवाया है अब सरकार उसकी रिकवरी करने की योजना भी बना रही है तथा बहुत जल्द कार्यवाही हो सकती है। ये वही लोग हैं जिन्होंने सरकारी बंगले पर कब्जा बनाये रखने के लिए संविधान संशोधन तक कर डाला था। आज भाजपा को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। रोजा इफ्तार के नाम पर एक बार फिर मुसलमानों को ठगने के लिये निकल पड़े हैं। मुस्लिम समाज को भी यह अच्छी तरह से याद रखना चाहिए कि समाजवादी सरकार में ही सबसे अधिक दंगे हुए थे। कब्रिस्तानों के निर्माण के नाम पर घोटाला करने वाले समाजवादी ही हैं जिसकी जांच चल रही है। ये लोग ईवीएम के खिलाफ इसलिए आवाज उठा रहे हैं क्योंकि यह लोग अराजकता व गुंडई के बल पर लोकतंत्र की हत्या करना चाहते हैं। जनता को ऐसे समाजवादियों से बेहद सतर्क हो जाना चाहिए।
मृत्युंजय दीक्षित