गिफ्ट में चांद

मुझे गिफ्ट में चांद मिला है. मैं यह चांद किसी को नहीं दूंगी. मुझसे कोई मांगना भी मत. पता है कब मिला था मुझे गिफ्ट में चांद? 1970 में, जब मैं महज 10 साल की थीं, तब मुझे पहले अंतरिक्षयात्री नील आर्म स्ट्रांग ने अपने हाथों से लिखे एक लेटर के साथ एक छोटी बॉटल में मून डस्ट गिफ्ट की थी. नील मेरे पिता के दोस्त थे. मैं बच्ची थी, कुछ सालों तक सहेलियों को दिखाती-बताती रही, फिर भूल-भाल गई. अब मुझे अपने पेरेंट्स के सामान में से वो बॉटल वापस मिली है. अब मैं उस पर अपना ही हक जताना चाहती हूं, मैं नहीं चाहती कि NASA मुझसे वो बॉटल वापस ले.

अक्सर लोग प्यार में कहते रहते हैं-

”चाहो तो तुम्हारे लिए चांद-तारे तोड़कर ले आऊं.”

पर आज तक तो कोई ला ही नहीं पाया है. चांद तो क्या, चांद से जुड़ा कोई भी सामान धरती के लोगों के लिए किसी दुर्लभ वस्तु से कम नहीं है. अपोलो के अंतरिक्ष यात्री चांद से कुछ सामान धरती पर लेकर आए थे, लेकिन वो भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है. अमेरिका के Cincnnnati की रहने वाली मैं लौरा सिको उन चंद खुशकिस्मत लोगों में से हूं, जो कि चांद के एक हिस्से पर अपनी दावेदारी पेश कर सकती हूं. इसलिए मैंने NASA पर केस किया है, कि NASA उनसे उनका हिस्सा वापस लेने की कोशिश नहीं करेगा. आप ही बताइए, मैंने ठीक किया न! गिफ्ट में मिला चांद कैसे लौटा दूं?

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।