सीड बॉम्बिंग से सीड राइस तक

बॉम्बिंग का नाम सुनते ही हमारा घबरा जाना स्वाभाविक है, लेकिन सीड बॉम्बिंग के साथ ऐसा नहीं है. सीड बॉम्बिंग एक मजेदार और उपयोगी बॉम्बिंग है. सीड बॉम्बिंग क्यों की जाती है और कैसे की जाती है, आप भी जानना चाहेंगे न! आइए सीड बॉम्बिंग के बारे में जानते हैं. सीड बॉम्बिंग से पहले हम आपको एक और राज की बात बताना चाहते हैं.
एक अनोखा सीड गिफ्ट कॉर्ड

आजकल बाजार में ऐसे गिफ्ट कॉर्ड भी मिलने लगे हैं, जो महज गिफ्ट कॉर्ड न होकर अपने अंदर एक सुंदर पौधा समाए रखते हैं. गमले में मिट्टी-पानी डालकर निराई-गुड़ाई करके यह गिफ्ट कॉर्ड गाड़ दीजिए, उसे मौसम और आवश्यकतानुसार पानी देते रहिए, एक सप्ताह बाद तुलसी के गिफ्ट कॉर्ड में से तुलसी का पौधा निकल आएगा और टमाटर के गिफ्ट कॉर्ड भी में से टमाटर का पौधा. है न अनोखी बात!
सीड बॉम्बिंग से गरिला गार्डनिंग: ऐसे छाएगी मुंबई में हरियाली

बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए कई बार दुख होता है कि इस तरह हम पर्यावरण के साथ क्या खिलवाड़ कर रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सिर्फ दुखी नहीं होते, बल्कि निकलते हैं बदलाव करने. कोई जमीन पर घूम-घूमकर पौधे लगा रहा है तो कोई आसमान से बीजों की बरसात कर रहा है. आसमान से बीजों की बरसात करने को ही सीड बॉम्बिंग कहा जाता है.

सीड बॉम्बिंग के लिए बीज मिट्टी और पोषिक तत्वों, खाद आदि में लपेटकर फेंके जाते हैं ताकि कुछ दिन तक इन्हें आसानी से पोषण मिलता रहे. यह एक जापानी तरीका है जिसे सीड बॉम्बिंग कहते हैं. इस तरीके को अब दुनिया के कई कोनों में अपनाया जा रहा है. यह काम वह ज्यादातर शहर के बाहर करते हैं. मुंबई में यह काम बहुतायत से किया जा रहा है.

 

तीसरी पास गरीब किसान ने चावल की 9 नई किस्म की खोज

तीसरी कक्षा पास कृषि वैज्ञानिक दादाजी खोब्रागडे ने धान (चावल) की 9 नई प्रजातियां इजाद की थीं, जिसे उन्होंने पेटेंट तक नहीं कराया. वह दूसरे किसानों को मुफ्त में बुआई के लिए अपनी इजाद की गई प्रजाति के चावल दिया करते थे. जीवन के अंतिम दौर में उन्हें पैरालिसिस हो गया. इसी महीने उनका निधन हो गया. गरीबी के कारण ही उनकी पढ़ाई महज तीसरी तक ही हो सकी. उन्होंने अपना पूरा जीवन धान की नई प्रजातियां खोजने में लगा दिया. फोर्ब्स पत्रिका ने उनके और उनके द्वारा ईजाद धान की प्रजातियों के बारे में दुनियाभर को बताया.
इसी के साथ सीड बॉम्बिंग से सीड राइस तक के इस ज्ञानवर्द्धक, रोचक व उपयोगी ब्लॉग को विराम देते चलते हैं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।