अभिलाषा

छोटे-छोटे बालक हैं हम,
काम मगर करते हैं महान,
मत समझो कमजोर हमें तुम,
साहस में ही अपनी शान.

आंधी-पानी-तूफानों से,
डर जाएं जो हम वो नहीं,
बाधाएं कितनी भी आएं,
हमको उनका गम है नहीं.

नदियां हों या पर्वत-खाई,
हमें डरा नहीं पाएंगे,
ताकत के पुतले बनकर हम,
आगे बढ़ते जाएंगे.

हम हैं अपने देश की आशा,
प्रेम-प्यार है अपनी भाषा,
दुखीजनों के शूल हटाएं,
यह ही है अपनी अभिलाषा.

हममें से थे भगत-हकीकत,
हममें से थे वीर शिवा,
गांधी-नेहरू-तिलक-गोखले,
जो थे देश के स्वप्न दिवा.

आजादी के हम सैनिक थे,
अब आजाद देश के वासी,
आजादी अक्षुण्ण रखने को,
तन-मन-धन से हम हैं प्रयासी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।