फिटनेस का एक सरल मंत्र: जीभ का व्यायाम

                                                                               योग दिवस 21 जून पर विशेष

हर व्यक्ति स्वस्थ जीवन व्यतीत करना चाहता है और फिट रहने के लिए अनेक यत्न भी करता है. स्वस्थ जीवन का एक मंत्र है- जीभ का व्यायाम. यह व्यायाम अत्यंत सरल होने के साथ-साथ अत्यंत लाभदायक भी है.

अल्ज़ाइमर एक भयंकर व अत्यंत पीड़ादायक रोग है. अल्ज़ाइमर का रोगी खुद तो भयंकर पीड़ा सहता ही है, परिवार व तीमारदारों को भी अत्यंत परेशानी का सामना करना पड़ता है. जीभ का यह सरल व्यायाम अल्ज़ाइमर को तो नियंत्रि करता ही है. इसके अतिरिक्त-

शरीर का वज़न का संतुलन होना
ब्लड प्रेशर नियंत्रित होना
मस्तिष्क में अवरोध (खून का थक्का जमना) ठीक होना 
अस्थमा ठीक होना 
दृष्टि में सुधार होना
कान के रोग ठीक होना 
गले का इंफेक्शन ठीक होना 
कंधे व गले का ठीक होना 
अनिद्रा का रोग ठीक होना
कमजोरी व थकावट ठीक होना
पाचनशक्ति में सुधार
फ्लू व सर्दी ठीक होना

 

 

स्वस्थ जीवन के सरल मंत्र जीभ के व्यायाम की विधि-

सुबह मुंहं धोते समय आइने के सामने यह व्यायाम कीजिए-

पूरी जीभ को बाहर निकालकर 10 बार दांएं-बांएं घुमाइए.

 

 

मेरा निजी अनुभव-

मैंने कुछ दिनों से यह व्यायाम शुरु किया है. मुझे ऐसा अनुभव हुआ है, कि मस्तिष्क सजग व सचेत रहने लगा है, कमजोरी, थकावट व पाचनशक्ति में सुधार हुआ है. सम्भवतः इसका कारण यह है, कि व्यायाम के समय हमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक मिलती है, जो हमें पूरा दिन स्वस्थ, सजग व सचेत रहने में सहायता करती है.

 

पुनश्च-
इसी से मिलता-जुलता आसन सिंहासन है, जिसमें जीभ बाहर निकालकर सिंह की तरह गर्जना की जाती है. उसकी

सिंहासन इस तरह करें-

घुटनों को फैलाकर वज्रासन में बैठ जाइये. यदि सम्भव हो तो सूर्य की ओर मुंह करके बैठिये. हाथों को घुटनों के बीच में जमा दीजिए तथा अंगुलियां शरीर की तरफ रखिए. सीधी भुजाओं के सहारे थोड़ा आगे की ओर झुकिये तथा सिर पीछे की ओर उठाइये.

इसके बाद मुंह को खोलिए और जितना सम्भव हो सके जीभ को बाहर निकालिये. आंखों को पूरी तरह खोलकर आसमान में देखिये. नाक से श्वास लीजिये. श्वास को धीरे-धीरे छोड़ते हुए गले से स्पष्ट और स्थिर आवाज निकालिये. इसे जीभ को निकालकर व दाएं-बाएं घुमाकर भी करते हैं.

गले से की जाने वाली ध्वनि के अनुसार श्वास को धीरे-धीरे लीजिये व छोड़िए. सामान्य स्वास्थ्य में 10 बार करें. विशेष बीमारी में अधिक समय तक किया जा सकता है.

यह गले सम्बन्धी, फेफड़ों और गर्दन से ऊपर के अंगों से सम्बंधित रोगों में लाभप्रद है,ऐसा माना जाता है.

आशा है आपके लिए भी ये व्यायाम लाभप्रद सिद्ध होंगे. आप भी कामेंट्स में अपने अनुभव लिख सकते हैं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।