तू हमको क्षमा करना

यह विनती है दयानिधान, तू हमको क्षमा करना
हम हैं तेरी संतान, तू हमको क्षमा करना-

 

हमने सुना दया का सागर
भरने दे हमको भी गागर
हे प्रभु दयानिधान, तू हमको क्षमा करना-

क्षमा है जीवन का आभूषण
दूर करे तन-मन के दूषण
कर देना कल्याण, तू हमको क्षमा करना-

क्षमा से तन-मन-जग हो अलंकृत
आत्मा को करती है झंकृत
(दे) सहनशीलता दान, तू हमको क्षमा करना-

क्षमा शोभती है शूरों को
राह दिखाती है वीरों को
(दे) धैर्य-शौर्य का दान, तू हमको क्षमा करना-

सत्य-अहिंसा-समता देना
करुणासागर शरण में लेना
हम तो हैं अनजान, तू हमको क्षमा करना-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।