मालिक

 

भूतपूर्व मंत्री रामप्रसाद जी से एक घोटाले को लेकर पूछताछ चल रही थी । जांच टीम के मुख्य अधिकारी शर्मा जी ने उन्हें चेताया ,” सर ! आपके खिलाफ हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि घोटाले आप ने ही किये हैं । बस आप हमसे सहयोग करते हुए बता दीजिये कि घोटाले की रकम आपने कहाँ कहाँ लगा रखी है ? ”
रामप्रसाद जी खा जानेवाली निगाहों से शर्मा जी को घूरते हुए बोले ,” हैं ! पुख्ता सबूत हैं ! कैसे ? जब उ घोटाला हो रहा था तब तो तुम ही न हमरे खास सचिव थे । का कहे थे कि बिंदास घोटाला करो । कउनो सबूत नाहीं रहेगा । ”
” वो तो हम अपनी ड्यूटी किये सर ! ” शर्मा जी मुस्कुराए !
” तो ई आज का कर रहे हो ? ”
” सर् ! मैं आज भी अपनी ड्यूटी कर रहा हूँ । बस फर्क इतना है कि मेरा मालिक बदल गया है । “

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।