गीत/नवगीत

क्यों न लगाएं आसन मेला?

आई योग दिवस की वेला, क्यों न लगाएं आसन मेला
क्यों न लगाएं आसन मेला, आया समय बड़ा अलबेला-आई योग दिवस——

रोग निवारण करने वाला योग ही हैSSS
जीवन सबल बनाने वाला योग ही हैSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

चक्रासन से पेट-पीठ को स्वस्थ करेंSSS
ताड़ासन से पैरों को मज़बूत करेंSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

पवनमुक्तासन गैस से मुक्ति दिलाता हैSSS
मयूरासन कफ़-मुक्ति सुमन खिलाता हैSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

हलासन से बवासीर और शुगर हटेंSSS
वक्रासन से मेरुदंड को स्वस्थ करेंSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

योग करोगे मौज हमेशा बनी रहेSSS
कितने सुंदर कितने स्वस्थ हो दुनिया कहेSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

हर आसन की महिमा बहुत ही है न्यारीSS,
इनसे सजाएं तन-मन की हम फुलवारीSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 

रोग निवारण करने वाले उपकारीSS
तन-मन सबल बनाते हैं ये हितकारीSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

2 thoughts on “क्यों न लगाएं आसन मेला?

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    yoga ke baare men geet bahut achha laga lila bahan .

  • लीला तिवानी

    संयुक्‍त राष्‍ट्र ने 21 जून को अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून के एफआरआई कैंपस में योग करके देश का नेतृत्‍व कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनियाभर में उगते सूरज के साथ योग शुरू हो गया है। योग समाज को जोड़ने का काम कर रहा है और व्‍यक्ति के जीवन में शांति की अनुभूति ला रहा है.

    पीएम ने कहा कि देहरादून से लेकर डबलिन तक, शंघाई से शिकागो तक योग ही योग है। योग पूरी दुनिया को जोड़ रहा है.

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