कुण्डलियाँ

महबूबा को दे दिए, भइया अमित तलाक
छाती पीट सिसक रहा, नीच निकम्मा पाक
नीच निकम्मा पाक, शॉक पंजे को लागा
अब्दुल्ला गद्दार, पुनः सोते से जागा
कह सुरेश सैनिक के हाथ थमाओ सूबा
बिना ‘हलाला’ गाँठ न जोड़ेंगे महबूबा ।।

नौ दिन तक अनशन किए, मिस्टर नटवरलाल
अब दस दिन तक करेंगे, कर्नाटक को लाल
कर्नाटक को लाल, उड़न छू करके खाँसी
ब्लडप्रेशर को भी देंगे, अब कजरी फाँसी
कह सुरेश फिर दिल्ली में आकर के भौं-भौं
हे नौटंकीबाज, कहाँ लौ गाथा बरनौ ।।

सुरेश मिश्र

परिचय - सुरेश मिश्र

हास्य कवि