पुस्तक समीक्षा

आर्थिक—सामाजिक विसंगतियों पर शब्दों रूपी बाणों की वर्षा करती प्यारी कविताओं का गुलदस्ता

पुस्तक समीक्षा—

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पुस्तक- खोजना होगा अमृत कलश
कविता—संग्रह
कवि— राजकुमार जैन राजन
समीक्षक- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
अयन प्रकाशन, 1/20, महरौली , नई दिल्ली.110030
पृष्ठ—120, मूल्य— 240 रूपए
कविता कवि के अंतर्मन के अंतद्वंद्व से उपजी शब्दों की वह विथिका है जो कागज पर उभरे भावों की वजह से सब को अपनी ओर आकर्षित करने का दम रखती है. जिस वीथिका में जितने ज्यादा तरह- तरह के फूल होते हैं वह वीथिका उतनी सुंदर दिखाई देती है. राजकुमार जैन राजन के प्रस्तुत कविता संग्रह कविताओं रूपी फूलों से संग्रहित वही वीथिका है जिस सूक्ष्म संवेदनाओं रूपी भावों में भीगे, सार्थक उद्देश्य की सुगंध से सरोबार और शब्दों रूपी पंखुड़ियों से सजी कविताओं के पुष्पगुच्छों ने इसे खूबसूरती प्रदान की है.
इस संग्रह की कविताओं में अंतर्मन की व्यथा सम्पूर्ण भावों और संदेश के साथ व्यक्त हुई है. इस की बानगी देखिए-
उसे देखा था मैं ने दादर के पूल के नीचे
एक कोने में, निराशा के घनघोर बादलों में
टुकड़े-टुकड़े हुई जिंदगी के लिए,
रोशनी के टुकड़े ढूढते हुए
‘हाशिए पर जिंदगी’ कविता के यह पंक्तियां कवि के अंतर्भावों को व्यक्त करती है. वह निराशा के गर्त में डूबी जिंदगी के लिए अपनी कविता में जिस अंतर्द्वंद्व, रचनात्मक दाइत्वबोध और परिस्थितियों का शब्दचित्रण करता है वह पठनीय है. सम्पूर्ण कविता कवि के भावों को कागज पर उकेर कर रख देती है. पाठक जब कविता को पढ़ता हैं तब लगता है कि वह अपने मन के भावों को कविता में स्वयम पढ़ते हुए एक सुखद और मनोकुल अनुभूति कर रहा हैं.
राजकुमार जैन राजन कोमल मन के, जिज्ञासाओं से भरपूर, बालसुलभ चंचलता, चपलता और जोश से भरेपूरे व्यक्तित्व के सहृदय कवि है. इन की बेबाकी, सरलता, सहजता, सौम्यता इन के व्यवहार के साथ-साथ इन की रचनाओं में देखी जा सकती है. इसी की वजह से ये बड़ी से बड़ी और गंभीर से गंभीर बात बड़ी सहजता से कह जाते हैं. ‘जिंदगी का गीत’ कविता की यह पंक्तियां देखे—
मां बहनों से नाता तोड़
भ्रम के ताने—बाने में उलझ कर
अनाथों की तरह भटकते युवा—वृद्ध
फेंक रहे हैं हिंसा व नफरत के ढेले.
‘वही तुम कौन हो ?’ कविता में कवि अपनी पहचान के रूप में मानवता की पहचान खोजता हुआ नजर आता है. मानव कौन है ? कहां था और कहां पहुंच गया ? उस की पंरपरा, संस्कृति और इतिहास क्या था और क्या हो गया ? इस कविता में इसी गहरी संवेदनात्मक चिंता और सांस्कृतिक विद्रुपताओं का रेखांकित किया गया है. यह पाठकों को अपने मन में झांकने और जाँचने को प्रेरित करती है.
‘खण्ड—खण्ड अस्तित्व’ कविता में-
जखम जो उभरे सीने पर
ख्वाब में हिलमिलाते हैं
जब दिल का दर्द आंसू बन कर
आंखों से छलकता है
वेदनाएं थकी सांस—सी चलने लगती है.
कवि रिश्तों और संबंधों को बदलते मायने पर अपनी चिंता को कविता में पूरी सिद्दत के साथ महसूस करता है. वह जानता हैं कि बदलते समय और उस पर हावी होती मशीनरी संस्कृति ने मानवीय रिश्तों, उन के बीच की संवेदनों, आपसी तालमेल और कहानी द्वारा दी जाने वाली वाचिक और सांस्कृतिक परम्परा का नष्टभ्रष्ट कर दिया हैं. इसी की वजह से मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है.
‘खोजना होगा अमृत कलश’ कवि का यह संग्रह अपने शीर्षक के अनुरूप रिश्तों और संबंधों की टूटन, व्यवस्था और पंरपरा से पनपी विद्रुपताओं को, अपने मन की व्यथा में खो चुकी मानवता को अपनी कविता के माध्यम से खोजने का प्रयत्न करता है. संग्रह की कविताएं मनुष्य जीवन की जटिल यात्रा से उपजी उदासियों, कुंठाओं, पलायनवादिता, भोग्यवादी संस्कृति, एकल परिवार, बेरोजगारी, मशीनीयुग के प्रभाव, आधुनिक व्यवस्था की जटिलताओं से मिली असफलता और तनाव के बीच सरलता, सहजता, उमंग, उत्साह के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है.
संग्रहित कविता संग्रह की भाषा सहज, सरल और भावना प्रधान है. कविता को पढ़ते हुए ये सरलता और सहजता से ह्रदय की गहरे में उतरती जाती है. भाषाशैली में भावों को अनुसार गंभीरता और सहजता के साथसाथ सरलता का समावेश मिलता है. मगर पढ़ने पर वह सहज और ग्राहिय रूप से सभी को प्रभावित करती हैं.
छंदमुक्त कविता शैली में लिखी गई कवितायेँ अपने उद्देश्य को सार्थक कर के पाठकों के मन को उद्देलित करते हुए अपना अचूक प्रभाव छोड़ जाती हैं. कविता पढ़ने के बाद पाठक बहुत देर तक अपलक उस के भावों को समझाने और अंतर्मन में आत्मसात करता हुआ महसूस करता है. पाठक को लगता हैं कि ऐसा कुछ है जो छूट रहा है वह जीवन में पकड़ना बहुत जरुरी है. अन्यथा आने वाली पीढ़ी हमे कभी माफ़ नहीं करेगी.
संग्रह की प्रत्येक कविता सौद्देश्य लिखी गई है. इन को पढ़ने के बाद कह सकते हैं कि राजकुमार जैन राजन रचनात्मक दाइत्वबोध के कवि है. इन की कविता में सामाजिक जटिलताओं और समस्याओं के दर्शन होते हैं. मैं समझता हूं कि इन का प्रस्तुत कविता संग्रह लेखकों और पाठकों के बीच अपनी गहरी पकड़ बना कर अपने सफलता के परचम लहरायाएगा, क्यों कि जीवन की जटिलताओं में से यह काव्य अमृत कलश खोजने की बहुत बड़ी कोशिश करता हैं. कवि वाकई बधाई का पात्र हैं. इस ने पहली काव्य रचना में अपने सम्पूर्ण भावों को उड़ेल कर काव्य साहित्य को एक अनुपम कृति प्रदान की है.
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समीक्षक-
ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
पोस्ट ऑफिस के पास , रतनगढ़
जिला- नीमच- ४५८२२६ (मप्र)
9424079675

परिचय - ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

नाम- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जन्म- 26 जनवरी’ 1965 पेशा- सहायक शिक्षक शौक- अध्ययन, अध्यापन एवं लेखन लेखनविधा- मुख्यतः लेख, बालकहानी एवं कविता के साथ-साथ लघुकथाएं. शिक्षा- एमए (हिन्दी, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र, इतिहास) पत्रकारिता, लेखरचना, कहानीकला, कंप्युटर आदि में डिप्लोमा. समावेशित शिक्षा पाठ्यक्रम में 74 प्रतिशत अंक के साथ अपने बैच में प्रथम. रचना प्रकाशन- सरिता, मुक्ता, चंपक, नंदन, बालभारती, गृहशोभा, मेरी सहेली, गृहलक्ष्मी, जाह्नवी, नईदुनिया, राजस्थान पत्रिका, चैथासंसार, शुभतारिका सहित अनेक पत्रपत्रिकाआंे में रचनाएं प्रकाशित. विशेष लेखन- चंपक में बालकहानी व सरससलिस सहित अन्य पत्रिकाओं में सेक्स लेख. प्रकाशन- लेखकोपयोगी सूत्र एवं 100 पत्रपत्रिकाओं का द्वितीय संस्करण प्रकाशनाधीन, लघुत्तम संग्रह, दादाजी औ’ दादाजी, प्रकाशन का सुगम मार्गः फीचर सेवा आदि का लेखन. पुरस्कार- साहित्यिक मधुशाला द्वारा हाइकु, हाइगा व बालकविता में प्रथम (प्रमाणपत्र प्राप्त). मराठी में अनुदित और प्रकाशित पुस्तकें-१- कुंए को बुखार २-आसमानी आफत ३-कांव-कांव का भूत ४- कौन सा रंग अच्छा है ? संपर्क- पोस्ट आॅफिॅस के पास, रतनगढ़, जिला-नीमच (मप्र) संपर्कसूत्र- 09424079675 ई-मेल opkshatriya@gmail.com

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