Monthly Archives: June 2018

  • अमल

    अमल

    उस दिन मैं सैर पर जा रही थी और मनीषा कार में ड्राइविंग सीट पर बैठने वाली थी. उसने मुझसे नमस्ते की. पतली-सी मासूम चेहरे वाली मनीषा को कार की ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए देखकर...

  • अँधी सोच….

    अँधी सोच….

    मेघा एक बेबस लाचार असहाय वक़्त की मारी हुई वो लड़की थी, ‘जिसे ईश्वर ने बेहद खूबसूरती से नवाज कर साथ में गरीबी, अपाहिज बाप, दमे की मरीज मां व तीन छोटे भाई बहनों की जिम्मेदारी...

  • दोहे

    दोहे

    जैसे भी हो जोड़िये,दिल से दिल के तार। निजता में होती नहीं, कभी जीत या हार।। शीशे के घर में नहीं, मिल सकता है चैन। पत्थर रोज उछालते, लोग यहां दिन रैन।। अपनी भाषा से मिला,अपनी...

  • विरह

    विरह

    प्रियतम तुम आयी थी, जीवन को महकाने, सूनी आँखो में फिर से नये सपने सजाने। वह बसन्त की स्वर्णिम बेला,वह मादक अँगडाई, दरवाजे पर घनी छाँव में , वह झूला पुरवाई। कुछ हरषाती तुम जब मुस्कुराती,...

  • मौसम

    मौसम

    कितना सुहाना मौसम है हरा – भरा हरियाली है! रिमझिम बारिस की बूंदे झम-झम अवनि पर बरसे! छिपी धरती के सब बीज नव अंकुर हो जाते हैं! खेतों मे भी बनी क्यारियाँ धान – फसल भी...

  • हाईकू

    हाईकू

    हाईकू प्रीत मिलन मधुरमय बेला करे पुकार! नई उमंग मन मे है तरंग हुई मगन ! सुनी डगर निहारते सनम मिले कदम! लोग बेगाने बने इस तरह मिले सबक! अजनबी ये मन करता दुआ शुक्रिया तेरा?...

  • कौन अपना ???

    कौन अपना ???

    कहां, कब कोई हमेशा साथ होता है, हमेशा कोई संग रहे….. यह सपना कब साकार होता है ? वक्त के साथ बदल जाती है फितरत सबकी। जब तक स्वार्थ हो,तब तक ही साथ होता है। सत्य...

  • कमली

    कमली

    कमली। ###### कमली ….कमली पुकार पुकार के बच्चे उसके पीछे हाथ में पत्थर लिए दौड़ रहे थे. अपने फूले पेट को आंचल से ढ़के वह इधर से उधर बेबस हिरनी की तरह भाग रही थी. अचानक...

  • गिफ्ट में चांद

    गिफ्ट में चांद

    मुझे गिफ्ट में चांद मिला है. मैं यह चांद किसी को नहीं दूंगी. मुझसे कोई मांगना भी मत. पता है कब मिला था मुझे गिफ्ट में चांद? 1970 में, जब मैं महज 10 साल की थीं, तब...

  • “वक्त का गणित”

    “वक्त का गणित”

    कलाकारी करते समय कूँची थोड़ा आडा-तिरछा कमर की और जरा सा दूसरे जगह भी अपना रंग दिखा दी… हाथी पर चढ़े, टिकने में टक टाका टक अव्यवस्थित ऐसे कलश को देख मटका आँख मटका दिया… कलश...