पुस्तक समीक्षा

आर्थिक—सामाजिक विसंगतियों पर शब्दों रूपी बाणों की वर्षा करती प्यारी कविताओं का गुलदस्ता

पुस्तक समीक्षा— ————————————————————————————————————————————— पुस्तक- खोजना होगा अमृत कलश कविता—संग्रह कवि— राजकुमार जैन राजन समीक्षक- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ अयन प्रकाशन, 1/20, महरौली , नई दिल्ली.110030 पृष्ठ—120, मूल्य— 240 रूपए कविता कवि के अंतर्मन के अंतद्वंद्व से उपजी शब्दों की वह विथिका है जो कागज पर उभरे भावों की वजह से सब को अपनी ओर आकर्षित करने […]

कविता

देव दयानन्द

घनघोर तिमिर फैला था भारत भू पर घर – घर में बसा था झूठा आडम्बर तब भारत भू पे एक किरण आशा की आई उसने अज्ञान – अंधेरे वाली रात मिटाई लिख सत्यार्थ प्रकाश जग का उपकार किया फिर इस जग ने उस ज्ञानवीर को क्या दिया पीकर जहर के कड़वे घूंट देव दयानन्द स्वयं […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

कबीर दास और मूर्तिपूजा

(कबीर जयंती पर विशेष रूप से प्रकाशित) कबीर दास ने जीवन भर मूर्ति पूजा और साकार ईश्वर की उपासना का विरोध किया। पर समय का फेर देखिये जिन कबीर दास ने जीवन भर मूर्ति पूजा का विरोध किया था। उन्हीं कबीर के नाम पर एक स्वयंभू कबीरपंथी ने कबीर की ही मूर्ति बनाकर, उनकी मूर्ति […]

कुण्डली/छंद

“कुंडलिया”

बादल घिरा आकाश में, डरा रहा है मोहिं। दिल दरवाजा खोल के, जतन करूँ कस तोहिं॥ जतन करूँ कस तोहिं, चाँदनी चाँद चकोरी। खिला हुआ है रूप, भिगाए बूँद निगोरी॥ कह गौतम कविराय, हो रहा मौसम पागल। उमड़-घुमड़ कर आज, गिराता बिजली बादल॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

कविता

।। गणपति बप्पा ये क्या हो रिहा ।।

।। गणपति बप्पा ये क्या हो रिहा ।। हे! गणपति बप्पा मोरया, भारत में देखो क्या हो रिहा, प्रधानमंत्री के हत्या की साज़िश भारत में ही हो रिहा। जिनके पूर्वज मरे थे ऐसे ही पर उनको भी शंका हो रिहा, प्रधानमंत्री की हत्या के साजिश पर भी राजनीति हो रिहा। हे! गणपति बप्पा मोरया, भारत […]

राजनीति

कांग्रेसियों ने ली राहुल बाबा की सुपारी

मुझे तो अपनों ने लुटा गैरों में कहां दम था। मेरे कश्ती थी डूबी वहां जहां पानी ही कम था। यहां पर हिंदी फिल्म दिलवाले का यह डायलांग एक दम सटीक बैठता है। वैसे तो राहुल गांधी अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। वह भाजपा को हराने के लिए हर एक कोशिश कर […]

गीत/नवगीत

गीत : गौरव चौहान

(सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो आने के बाद सबूत मांगने वाले नेताओं को धिक्कारती कविता) सत्य शौर्य साहस को छल बतलाने वाले नेता सुन सर्जीकल को फर्जीकल बतलाने वाले नेता सुन सुन कानों को खोल गरजती बंदूकों बम गोलों को देख ज़रा आँखों से सरहद पार गिरे उन शोलों को देख ज़रा धूं धू कर जलती […]

लेख

सरकार की आलोचना

किसी भी सरकार के कामों नीतियों का विश्लेषण अपने निजी राजनैतिक दृष्टि से परे जाकर करना चाहिए। अभी पिछले दिनों वर्तमान सरकार की नीतियों से उपजे प्रभाव पर एक साथी से कुछ चर्चा हुई। इस चर्चा के कुछ बिंदु इस प्रकार के थे – साथी का कहना था कि सरकार की कुछ आर्थिक नीतियों के […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

इस शहर का हर शख्स मेरा राज़दां है अब जो राज़ कल तलक था वो दास्तां है अब ========================== जो समझते थे दुनिया न चलेगी उनके बिन उन तवंगरों का बाकी न कोई निशां है अब ========================== वो शख्स मर गया है जिसको तेरी तलब थी मैं क्या करूँ बला से जो तू मेहरबां है […]

कविता

एहसास

पहली बार मिले थे ,तब मैं तुम्हें बस देखता रहा उस समय मेरा ख्याल था, कि तुम्हें मैं अपनी आंखों में छुपा लूं बड़ी मुद्दतों और बड़ी कोशिशों के बाद मैं मिला तुमसे दोबारा अबकी बार बस एक ख्वाहिश थी दिल की तुझे छू भर लूँ तेरी आंखों ने जवाब भी दे दिया था मुझे […]