Monthly Archives: June 2018

  • हवा का रुख

    हवा का रुख

    हर समय हंसती-मुस्कुराती हुई नताशा को देखकर कोई नहीं कह सकता कि इसके अंदर इतना तूफान समाया हुआ है. आज शाम को उसे मेरे रूप में एक अच्छा श्रोता मिल गया और उसका गुब्बार बाहर उमड़...

  • खट्ठा-मीठा : चोरी मेरा काम

    खट्ठा-मीठा : चोरी मेरा काम

    पहले चारा चोर, बैसाखी चोर और मिट्टी चोर ही प्रसिद्ध थे। अब इस गौरवशाली परम्परा में एक नया नाम जुड़ा है “टोंटी चोर” का। ये जनाब मुल्ला यम सिंह के नूरे-नजर हैं और कुछ समय पहले...

  • यह छुईमुई नहीं कैक्टस है

    यह छुईमुई नहीं कैक्टस है

    लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस में एक महिला अपने पति के साथ पासपोर्ट बनवाने गई। महिला ने अपना नाम तन्वी सेठ आवेदन पत्र में भरा। महिला के पति ने अपना नाम मोहम्मद अनस सिद्दीकी भरा। पासपोर्ट अफसर ने...


  • मेरी कलम

    मेरी कलम

    जब से क़लम उठाई है, तब से मन करता है, कि जो लिखूँ सच लिखूँ पर दुनिया हमें ना सच लिखने देती है ना बोलने ! आखिर करूँ तो क्या ? फिर माँ ने कहा बेटा...

  • योग

    योग

    योग है, हमारे जीने का नया रास्ता, जो करें योग रहे स्वस्थ ! ना बढ़े मोटापा ना बढ़े मधुमेह ! आओ बहन योग करने चले ! सारी बीमारियों को छोड़ा कर योग चले ! तुम भी...

  • पहली बारिश

    पहली बारिश

    वो बचपन की पहली बारिश याद है हमें , जब मैंने उसे अपने हाथों पर महसूस किया था ! जब माँ ने मेरे साथ बैठ कर ही आँगन  में खाना खाया था ! वो बचपन की...

  • “रोला मुक्तक”

    “रोला मुक्तक”

    करो जागरण जाग, सुहाग सजाओ सजना। एक पंथ अनुराग, राग नहिं दूजा भजना। नैहर जाए छूट, सजन घर लूट न लेना- अपने घर दीवार, बनाकर प्यार न तजना॥-1 शयन करें संसार, रात जब आ फुसलाती। दिन...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    इक कुर्सी और खिड़की जैसे ज़िन्दगी सिमट के रह गयी थी वहीं जीवन की सांझ न खत्म होता इंतज़ार इंतज़ार भी अपने दिल के टुकड़ों का जो दिल मे रहते है मगर नज़रों से कोसों दूर...

  • पवित्र पाप (लघुकथा)

    पवित्र पाप (लघुकथा)

    “अरे पिता जी! आप…. इस समय?” शमशेर अपने पिताजी को रात के 10 बजे अपनी बैरक में देखकर हैरान था। शमशेर दूरदराज़ के एक छोटे-से गाँव का नौजवान है, जो अपनी कड़ी मेहनत से फ़ौज में...