Monthly Archives: June 2018

  • नींद

    नींद

    नींद उचट गई है , बारिश की बूंदे भीनी भीनी आसमान से छिटक रही है सवाल था बूंदों से मेरी नींद में खलल क्यों डाल दिया ? जज्बातों की हांडी में कुछ शब्द पक रहे थे...

  • कुंडलियाँ छ्न्द……

    कुंडलियाँ छ्न्द……

      लगता मेघों ने किया, गठबंधन मजबूत। इंद्रदेव का आज तो, बना दिवाकर दूत। बना दिवाकर दूत, समय पर हर दिन आता। तांडव करता रोज, उगल के ज्वाला जाता। जले जलाशय कुंड, विकल हो मानव जलता।...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

    महबूबा को दे दिए, भइया अमित तलाक छाती पीट सिसक रहा, नीच निकम्मा पाक नीच निकम्मा पाक, शॉक पंजे को लागा अब्दुल्ला गद्दार, पुनः सोते से जागा कह सुरेश सैनिक के हाथ थमाओ सूबा बिना ‘हलाला’...

  • समकालीन गीत

    समकालीन गीत

    धुंध हो गया सारा जीवन,कुछ भी नज़र नहीं आता ! आशाएं अब रोज़ सिसकतीं,कुछ भी नज़र नहीं आता !! बाहर भी है,अंदर भी है, सभी जगह कोहरा छाया न तुम सुधरे,न हम सुधरे, कुछ भी संवर...


  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    बसे नयनो में नीरज के, मिलो दीदार कर लेंगे। नयन भर कर निहारेंगे, तुम्हे स्वीकार कर लेंगे। तुम्हे है चाहते लाखो, मैं धड़कन सैकड़ो की हूँ, करो इकरार या इनकार तुमसे प्यार कर लेंगे।। कलेजा चीर...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हम नहीं डरते तिमिर के ज़ोर से, अन्ततः हम जा मिलेंगे भोर से। आपकी निष्ठा अभी संदिग्ध है, सच बताएं आप हैं किस ओर से। हम चले आते हैं खिंचकर आप तक, हम बंधे हैं प्रीति...

  • मार्केटिंग फंदा

    मार्केटिंग फंदा

    “अच्छा बड़ी खुशी की बात है, कब ज्वाइन किया आपने? वाह! अब तो पार्टी बनती है। नहीं …नही मुझे अभी कोई इन्श्योरेन्स नहीं करवानी।” पति फोन थामे ना जाने किनसे बात कर रहे थे,चेहरे का मनोभाव...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये मन मंदिर शानदार सदाबहार भावना अपार मूर्तियां जानदार।।-1 है भव्य नक्काशी वनवासी मथुरा काशी गोकुल यमुना भारतीय गहना।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी