कविता

नींद

नींद उचट गई है , बारिश की बूंदे भीनी भीनी आसमान से छिटक रही है सवाल था बूंदों से मेरी नींद में खलल क्यों डाल दिया ? जज्बातों की हांडी में कुछ शब्द पक रहे थे उन्हें इतना क्यों उबाल दिया आज नींद नहीं आई !! कमरे में बैठा ढूंढ रहा मैं कमरे की परछाई!! […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छ्न्द……

  लगता मेघों ने किया, गठबंधन मजबूत। इंद्रदेव का आज तो, बना दिवाकर दूत। बना दिवाकर दूत, समय पर हर दिन आता। तांडव करता रोज, उगल के ज्वाला जाता। जले जलाशय कुंड, विकल हो मानव जलता। गठबंधन मजबूत, किया मेघों ने लगता। *अनहद गुंजन 26/06/18*  

कुण्डली/छंद

कुण्डलियाँ

महबूबा को दे दिए, भइया अमित तलाक छाती पीट सिसक रहा, नीच निकम्मा पाक नीच निकम्मा पाक, शॉक पंजे को लागा अब्दुल्ला गद्दार, पुनः सोते से जागा कह सुरेश सैनिक के हाथ थमाओ सूबा बिना ‘हलाला’ गाँठ न जोड़ेंगे महबूबा ।। नौ दिन तक अनशन किए, मिस्टर नटवरलाल अब दस दिन तक करेंगे, कर्नाटक को […]

गीत/नवगीत

समकालीन गीत

धुंध हो गया सारा जीवन,कुछ भी नज़र नहीं आता ! आशाएं अब रोज़ सिसकतीं,कुछ भी नज़र नहीं आता !! बाहर भी है,अंदर भी है, सभी जगह कोहरा छाया न तुम सुधरे,न हम सुधरे, कुछ भी संवर नहीं पाया गीत पुराने कौन सुने अब,कुछ भी नज़र नहीं आता ! धुंध हो गया सारा जीवन,कुछ भी नज़र […]

इतिहास

वन्दे मातरम गीत और बंकिम चंद्र चटर्जी

(बंकिम चंद्र चटर्जी के जन्मदिवस 27/6/1838 पर विशेष रूप से प्रकाशित) आज बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्मदिवस है। आप प्रसिद्द गीत वन्दे मातरम के रचियता थे। हमारे देश के कुछ मुस्लिम भाई बहकावे में आकर वन्दे मातरम गान का बहिष्कार कर देते हैं। उनका कहना है कि वन्दे मातरम का गान करना इस्लाम की मान्यताओं […]

मुक्तक/दोहा

दो मुक्तक

बसे नयनो में नीरज के, मिलो दीदार कर लेंगे। नयन भर कर निहारेंगे, तुम्हे स्वीकार कर लेंगे। तुम्हे है चाहते लाखो, मैं धड़कन सैकड़ो की हूँ, करो इकरार या इनकार तुमसे प्यार कर लेंगे।। कलेजा चीर करके , प्यार का इजहार करते है। नयन को बंद करके , आप का दीदार करते है। मिलो या […]

हास्य व्यंग्य

हास्य- व्यंग्य : भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए…

मैं जिस शहर में रहता हूं इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां बंगलों का ही अलग मोहल्ला है। शहर के लोग  इसे बंगला साइड कहते हैं। इस मोहल्ला या कॉलोनी को अंग्रेजों ने बसाया था। इसमें रहते भी तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी ही थे। कहते हैं कि ब्रिटिश युग में किसी भारतीय का इस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हम नहीं डरते तिमिर के ज़ोर से, अन्ततः हम जा मिलेंगे भोर से। आपकी निष्ठा अभी संदिग्ध है, सच बताएं आप हैं किस ओर से। हम चले आते हैं खिंचकर आप तक, हम बंधे हैं प्रीति वाली डोर से। लूटने को आ गए डाकू कई, मुक्ति हमको मिल गयी जब चोर से। मन के कोलाहल […]

लघुकथा

मार्केटिंग फंदा

“अच्छा बड़ी खुशी की बात है, कब ज्वाइन किया आपने? वाह! अब तो पार्टी बनती है। नहीं …नही मुझे अभी कोई इन्श्योरेन्स नहीं करवानी।” पति फोन थामे ना जाने किनसे बात कर रहे थे,चेहरे का मनोभाव चढता उतरता देख आशा की उत्सुकता चरम पर पहुंच रही थी। किनसे बातें हो रही थी…. अरे संजय की […]

कविता

“पिरामिड”

ये मन मंदिर शानदार सदाबहार भावना अपार मूर्तियां जानदार।।-1 है भव्य नक्काशी वनवासी मथुरा काशी गोकुल यमुना भारतीय गहना।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी