लघुकथा

लौट आओ प्रमिला

प्रमिला, तुम्हें लौटना होगा. एक बार लौट आओ. 1960 के मार्च में हम आखिरी बार मिले थे. मुझे याद है कि हम बोर्ड के परीक्षा हॉल में तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे थे. पर्यवेक्षक को भी तुम्हारी खाली सीट परेशान कर रही थी. वे हाजिरी शीट नहीं भिजवा पा रहे थे. तुम नहीं आईं. आखिर बार-बार […]