पीएम मोदी मगहर से दे गये बहुत संदेश व संकेत

उत्तर प्रदेश में मिशन-2019 को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने संत कबीर दास के निर्वाण दिवस के अवसर पर संत कबीर के मगहर से अपने चुनावी अभियान का श्रीगणेश कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मगहर रैली पर प्रदेश ही नहीं लगभग पूरी दुनिया की नजरें उन पर लगी हुयी थीं तथा देशी व विदेशी मीडिया भी वहां से पलपल की खबरों व गतिविधियों पर अपनी बारीक नजरें गड़ाये था। मगहर में पीएम मोदी की रैली देखने के बाद मोदी व बीजेपी के प्रबल विरोधी भी यह मानकर चलने लगे हैं कि फिलहाल पीएम मोदी का जादू अभी जनमानस में कम नहीं हुआ है। संत कबीर दास के दोहों को सुनाते हुए पीएम मोदी ने जहां कबीर पंथियों को मंत्रमुग्ध करके उनको भाजपा के साथ जुड़ने का सुनहरा अवसर दिया वहीं विपक्ष पर भी अपने चिरपरिचित अंदाज में जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि हम गरीबों के लिए काम कर रहे वे केवल अपना बंगला बचाने के लिए काम कर रहे हैं। अपने भाषण में पीएम मोदी ने 20 लाख कबीर पंथियों सहित दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों, वंचितों व उदार मुस्लिम समाज के लोगों को विकास के मंत्र के साथ एक संदेश भी दे गये हैं।

भाजपा के रणनीतिकारों को अब यह एहसास हो गया है कि एकजुट विपक्ष के कारण अब 2019 की राह उतनी आसान नहीं रह गयी है। यही कारण है कि अब यूपी में पीएम नरेंद्र मोदी की ताबड़तोड़ जनसभायें व विकास योजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटनों में तेजी आने वाली है। लगभग सभी बड़े कार्यक्रमों में पीएम मोदी ही आने वाले हैं तथा बड़ी-बडी रैलियां करके अभी से चुनावी माहौल बनाने जा रहे हैं। मगहर रैली से बीजेपी ने चुनावी वातावरण बनाना शुरू कर दिया है। मगहर रैली से कई बडें संदेश पीएम मोदी ने जनमानस व विरोधी दलों को दे दिये हैं। पीएम मोदी ने तीन तलाक के मसले पर भी विरोधी दलों को घेरते हुए मुस्लिम महिलाओं को एक बड़ा संदेश दे दिया है और कानून को अक्षरशः लागू करवाने का भरोसा भी दे गये हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को विशाल बहुमत दिलाने में तीन तलाक के मुद्दे ने भी अहम् भूमिका अदा की थी। अतः पीएम मोदी ने बेहद सोची समझी रणनीति के तहत तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर उसमें बाधा डालने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।

मगहर में कबीर की स्थली से पीएम मोदी के भाषण पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई थीं। मगहर यात्रा सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी। पीएम इन मगहर दुनिया के टाप ट्रेंड में छा गया था। प्रधानमंत्री ने मगहर के मंच से दुनियाभर को कबीर के विचारों व संदेश को याद किया। टीवी मीडिया पर चर्चा की जा रही थी कि पीएम मोदी टीवी पर चल रहे सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो पर भी कुछ बोलेंगे और कांग्रेस व विपक्ष से माफी मांगने आदि की बात करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पीएम मोदी ने न तो सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख किया और न ही जम्मू कश्मीर को लेकर चल रही गतिविधियों पर कुछ बोले। उनका भाषण पूरी तरह कबीर, उप्र और उप्र की राजनीति पर ही केंद्रित रहा।

टीवी चैनलों में पीएम मोदी व सीएम योगी की मगहर यात्रा को कई एंगिल से परखने की कोशिश की और उसमें भी नकारात्मकता को खोजने का पूरा प्रयास किया गया। मगहर दौरे के दौरान पीएम मोदी व सीएम योगी आदित्य नाथ ने संत कबीर दास की समाधि पर चादर चढ़ाई और पुष्पाजंलि देकर श्रद्धांजलि अर्पित की वह तो किसी को नहीं दिखा, लेकिन सीएम योगी ने एक बार फिर टोपी पहनने से साफ मना कर दिया वह जरूर सेकुलर लोगों को दिखाई पड़ गया। पीएम मोदी ने अपनी रैली में सामाजिक समरसता को बढ़ाने व विकास का साथ देने का संदेश दिया वह सेकुलर लोगों को नहीं दिखाई दिया। सीएम योगी ने मगहर में टोपी नहीं पहनी यह सेकुलर लोगों और उनके समर्थक मीडिया चैनलों को बहुत बुरा लगा और उनकी नीयत पर संदेह जताया जाने लगा।

इस विषय पर चर्चा करवाने की कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोई मुसलमान नहीं हैं और नहीं सेकुलर जमात के हैं। वह नाथ संप्रदाय के महान हिंदू संत हैं। वह कई बार इस बात का उल्लेख भी कर चुके हैं तथा सार्वजनिक रूप से साफ बता भी चुके हैं। यह मुख्यमंत्री व पीएम के साथ जानबूझकर घिनौनी व विकृत राजनीति की जा रही है। देश व प्रदेश में पहली बार भगवा विचारधारा से ओतप्रोत लोग राजगद्दी पर बैठे हैं। यह टोपीधारियोें को रास नहीं आ रहा है। उनको बदनाम करने के लिए हर जगह कोई न कोई विकृत नाटक खेला जाता है। आज जो लोग सीएम व पीएम को टोपी पहनाने का असफल प्रयास करते हैं, उन्हेें उन लोगों से पूछना चाहिए कि जो लोग मुस्लिम टोपी पहनकर हर साल रोजा इफ्तार करने चले आते है, उन्होंने मुस्लिम समाज का कितना भला किया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि टीवी चैनलों में आज जो बहसें हो रही हैं वे सब अपने आकाओं को खुश करने के लिए प्रायोजित करायी जा रही हैं।

विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि पीएम मोदी ने 20 लाख कबीर पंथियों के वोटों के लालच में मगहर की यात्रा की है तथा बीजेपी महापुरूषों का भी राजनीतिकरण कर रही है आदि-आदि। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति करने वाले दलों के नेताओं और प्रधानमंत्रियों ने कभी भी मगहर का इस प्रकार का दौरा नहीं किया। बीजेपी ने कबीरपंथियों बीच में यह अच्छा संदेश पहुंचाने में सफलता प्राप्त कर ली है कि पीएम नरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले पीएम बन गये हैं जिन्होंने संत कबीर की निर्वाण स्थली का ऐतिहासिक दौरा किया और उनके अनुयायियों को विशाल रैली के माध्यम से संबोधित भी किया है। यही बात विपक्ष को अखर रही है।

राजनैतिक विश्लेषकों क अनुमान है कि पीएम ने मगहर यात्रा से दो निशाने साधे हैं। पहला उन्होंने कबीरपंथियों को राजनैतिक नजरिये से बीजेपी के साथ साधने का प्रयास किया है। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर देखा जाये तो कबीरपंथियों का हरियाणा पंजाब व यूपी से सटे बिहार के जिलों सहित यूपी में बस्ती व गोरखपुर मंडल की 15 लोकसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव है। कबीर पंथियों में मुख्यरूप से दलित व पिछड़ों में अतिपिछड़े उनके अनुयायी हैं। मध्यमवर्गीय प्रबुद्धजनों को भी पीएम मोदी ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया है लेकिन टीवी चैनलों को वह नहीं सुनायी पड़ रहा। जिन सीटों पर कबीरपंथियों का विशेष प्रभाव है उनमें लालगंज, आजमगढ़, सलेमपुर घोसी व बलिया, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीर नगर जबकि गोरखपुर मंडल के अंतर्गत महराजगंज, गोरखपुर, बांसगांव, कुशीनगर व देवरिया तथा आजमगढ़ मंडल में भी इन लोगों का अच्छा खासा वोट बैंक है।

पीएम मोदी मगहर यात्रा को जो लोग अपनी राजनीति बता रहे हैं जरा उन लोगों को अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए और जरा सही बोलना और सोचना चाहिए। विगत 70 सालों में परिवारवादी कोई भी प्रधानमंत्री मगहर नहीं पहुंच पाया और जातिवाद की राजनीति करने वाली बसपा नेत्री और अपने आप को दलितों की बेटी कहने वाली मायावती तथा परिवारवादी मुलायम और अखिलेश यादव ने तो आज तक मगहर में चादर तक नहीं चढ़ाई। पीएम मोदी का विरोध करना तो सही है लेकिन इन दलों को जरा सोचना चाहिए कि इन लोगों ने संत कबीरदास और संत रविदास के साथ कैसा व्यवहार किया है। ये सभी लोग केवल अपने परिवार का विकास करने में ही लगे रहे और दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों और वंचितों को अपने वोटों का गुलाम बनाकर रखे रहे।

आज जब उनकी जमीन पूरी तरह से धराशायी हो रही है तथा उनके महापाप जनता के सामने एक के बाद एक खुलते जा रहे हैं तब वे महागठबंधन करने लगे है। क्योंकि कारण एकदम साफ है कि यह सभी गठबंधनवादी नेता दोमुंहे जहरीले सांप हैं तथा ये प्रदेश और देश को लगातार लूटते रहे, ये विकास के नाम पर केवल अपने परिवार का विकास करते चले गये और बसपा नेत्री मायावती तो दलितों की नहीं अपितु दौलत की बेटी बनकर उनकी हत्या की साजिश रचने वाले मुलायम सिंह यादव की गोेद में जाकर फिर से बैठ गयी है। आज स्वार्थ की राजनीति में मायावती को यादव परिवार दूध का धुला नजर आ रहा है। यह इतनी स्वार्थी है कि जिस बीजेपी ने उसको दो दो बार मुख्यमंत्री बनाया आज वह बीजेपी की दुश्मन नंबर वन बन गयी है।

देश व प्रदेश में सेकुलर दलों का 70 साल तक शासन रहा और उप्र में जातिगत आधार पर सपा और बसपा का शासन 25 साल तक रहा है लेकिन किसी ने भी संत कबीर और संत रविदास जैसे संतों को कभी याद नहीं किया। केवल आरक्षण के नाम पर सभी को बरगलाते रहे। कबीर के विचारों को जनमानस तक पहुंचाने और उन पर अधिक से अधिक शोध कराने के लिए पहली बार कबीर शोध अकादमी बनने जा रही है, जिसका शिलान्यास पीएम मोदी ने किया और उसकी जानकारी भी प्राप्त की।
मगहर यात्रा में पीएम मोदी के प्रति जनता का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह कहीं से भी नजर नहीं आ रहा था कि पीएम मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है। उनकी जनसभा में मोदी के प्रति जनता की दीवानगी साफ नजर आ रही थी।

मगहर यात्रा में जहां पीएम मोदी कबीर मय थे, तो वहीं मगहर मोदीमय हो गया था। यही बात विरोधी दलों को हजम नहीं हो रही। पीएम मोदी ने मगहर का स्वदेश दर्शन योजना के तहत विकास करने पर भी बल दिया है। पीएम मोदी दलित संतों के माध्यम से जनमानस को विकास व सामाजिक समरसता का संदेश देकर तथा अपने आप को गरीबों व पिछड़ों का मसीहा बताकर विरोधी दलों को भी संदेश दे दिया है। साथ कबीर के दोहे का उल्लेख करते हुए वह यह भी कह गये हैं कि काल करै सो आज कर। इसमें कई संदेश छिपे हैं जिससे विरोधी दल हैरान हो रहे हैं। पीएम मोदी एक-एक इंच का तेज गति से विकास करने की बात भी कह गये हैं जिसका असर तो पड़ेगा। वहीं अभी उनकी कई रैलियां होने जा रही हैं।

मृत्युंजय दीक्षित