मत्तगयंद सवैया

मधु सूदन मुरली धर मोहन ,
बृज को काहे बिसराय दियो |
मन प्राण निकाल चले मथुरा ,
यह देह निठुर बिसराय दियो |

बृषभानु दुलारी के हिय में ,
मनमोहन की छवि आनि सखी |
चितचोर चुराय लियो चित को ,
अब चैन नही दिन रात सखी |

बिरही लागे संसार सकल ,
हर अली कली कुम्हलाय गयी |
गोपी ग्वाले गऊँवें सगरी ,
माखन मिसरी बिखराय गयी |

मुरलीधर की मोहन मुरली ,
दिन -रात मोहे तड़पाय रही |
मथुराधि पते बिन दरश तेरे ,
नित अखियाँ नीर बहाय रही |

मंजूषा श्रीवास्तव
लखनऊ (यू. पी )

परिचय - मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016