लघुकथा – स्वर्ग जाने के कर्म

ग्राम प्रधान महेश चन्द्र ने वो हर गलत काम किये, जिससे अधिक से अधिक धन-दौलत कमायी जा सके | देखते ही देखते वह करोडों का मालिक बन बैठा | जो कभी पाई – पाई को तरसता था, उसके शानौ-शोकत राजा-महाराजाओं से कम नहीं थी | उसके यहाँ तहसीलदार, जिलाधिकारी, सांसद, विधायक, दरोगा, मंत्री हाजिरी देने लगे |
एक दिन अचानक से उसके क्रिया-कलाप बदल गये, अब वो साधु-संतों की सेवा करते हुए हुए देखा जा रहा था | श्रीमद् भागवत कथाएं आयोजित करवाने लगा था | बडे-
बडे भंडारे करने लगा था | यह सब देख उसके एक घनिष्ठ मित्र मदन कुमार ने महेश चन्द्र से उसके परिवर्तन के बारे में पूछ ही लिया | तब महेश चन्द्र ने जवाब दिया ‘भाई मदन मरने के बाद मुझे स्वर्ग जाना है | सारी जिंदगी इतने कुकर्म किए कि नरक पक्का था | एक बाबाजी ने सलाह दी अच्छे – अच्छे काम करने की, बस तभी से मेरी जिंदगी बदल गई है |’
मदन कुमार थोडे मुस्कराये और मन ही मन कहने लगे – नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को |

परिचय - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111