ए जिन्दगी………. तेरी नौकरी अब क्यू करूं

ए जिन्दगी………
तेरी नौकरी अब क्यू करूं

रोज तुझे सुलाता हूं मै
रोज तूझे नहलाता हॅू मै
इधर उधर ले जा करके
रोज तुझे टहलाता हूं मै
तुझे सुकूं देने की खातिर
कुर्बान मै अपना सुकूं करूं
ए जिन्दगी……….
तेरी नौकरी अब क्यू करूं

तेरी कितनी सेवा की है
क्या क्या तुझे खिलाया है
जब तू चढ़ नही सकती थी
तब से सर पे चढ़ाया है।
रास नही आती है मुझको
अब मै तुझसे हिसाब करूं
ए जिन्दगी……….
तेरी नौकरी अब क्यू करूं

तुझको अपना नाम दिया
सब कुछ तेरे नाम किया
अब तक मेरी चाहत का
क्या तूने ईनाम दिया।
तेरी चमड़ी की खातिर
दमड़ी मेरी खतम हुई
अब तेरी नौकरी छोंड रहा हूं
मै आजादी से सैर करूं
ए जिन्दगी……….
तेरी नौकरी अब क्यू करूं

नखरे अब तेरे बहुत हुए
कभी ये चाहे कभी वो चाहे
कब तक मै ऐसे दौडूंगा
खुद दौड़ जिसे अब तू चाहे
पल भर अब तेरे साथ यहां
रूकने को जी नही करता है
जिस दिन दामन छोंड तू दे
कहीं जाके दूर मै (राज) करूं
ए जिन्दगी……….
तेरी नौकरी अब क्यू करूं

राज कुमार तिवारी (राज)

परिचय - राज कुमार तिवारी (राज)

संवाददाता बाराबंकी उत्तर प्रदेश मो० 9984172782 इनका जन्म बाराबंकी जिले के जयचन्द्रपुर गांव के एक किसान के घर 1988 में हुआ था। इन्होने शिक्षा शास्त्र से परास्नाक की उपाधि प्राप्त की। इनको बचपन से ही लिखने का बड़ा ही शौख था, 15 वर्ष की आयु से ही इन्होने लिखना शुरू कर दिया था। 1998 से 2014 तक दूर दर्शन केन्द्र की मासिक पत्रिका से व लखनऊ से प्रकाशित होनेे वाली अन्य प्रत्रिका व समाचार पत्रों में भी स्थान प्राप्त किया। इनका कलम चलाने का सिलसिला अभी जारी है।