ज्ञान के दीप जला पाऊं

सद्बुद्धि दो मुझको राम,
करूं मैं अच्छे-अच्छे काम,
धनुष धरूं मैं न्याय के हेतु,
जग में हो मेरा भी नाम.
आज्ञाकारी मैं बन पाऊं,
भ्रातृप्रेम में मैं रंग जाऊं,
मानव बन मानवता के हित,
ज्ञान के दीप जला पाऊं

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।