जनसंख्या समस्या कैसे सुलझाओगे?

                                                         विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष
जनसंख्या समस्या को, कहो कैसे सुलझाओगे?
समय रहते न सुलझाया, उलझकर मात खाओगे-

1.कमी होगी जो अन्न की, कमी होगी दलहन की तो कैसे भूख मिटाओगे?
कमी होगी हर शै की, कमी होगी जो जल की तो कैसे प्यास बुझाओगे?
अभी सुलझा लो जग वालो, सुखी तब ही रह पाओगे
समय रहते न सुलझाया, उलझकर मात खाओगे-

2.न रहने को घर होगा, न चलने को पथ होगा, कहो कैसे रह पाओगे?
न पढ़ने को मिले भर्ती, न खेती हेतु धरती, कहो क्या कर पाओगे?
अभी सुलझा लो जग वालो, सुखी तब ही रह पाओगे
समय रहते न सुलझाया, उलझकर मात खाओगे-

3.न स्वच्छता रहेगी, न चिकित्सा मिलेगी, खुशी कैसे जुटाओगे?
जनसंख्या-बाढ़ होगी, तो लूट-मार होगी, कहो कैसे बच पाओगे?
अभी सुलझा लो जग वालो, सुखी तब ही रह पाओगे
समय रहते न सुलझाया, उलझकर मात खाओगे-

(तर्ज़-कि अपना दिल है आवारा, न जाने किस पे आएगा—-)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।