ग़ज़ल

ये जिंदगी तो’ हो गयी’ दूभर कहे बग़ैर
आता सदा वही बुरा’ अवसर कहे बग़ैर |
बलमा नहीं गया कभी’ बाहर कहे बग़ैर
आता कभी नहीं यहाँ’ जाकर कहे बग़ैर |
है धर्म कर्म शील सभी व्यक्ति जागरूक
दिन रात परिक्रमा करे’ दिनकर कहे बग़ैर |
दुर्बल का’ क़र्ज़ मुक्ति सभी होनी’ चाहिए
क्यों ले ज़मीनदार सभी कर कहे बग़ैर |
सब धर्म पालते मे’रे’ साजन, मगर है’ दूर
आकर गए तमाम निभाकर, कहे बग़ैर |
मिलने में’ थी हँसी ख़ुशी’ अब चैन भी नहीं
सुख चैन ले गए वो’ चुराकर कहे बग़ैर |
चौकस रहो सदा सभी’, गलती न कर कभी
बैरी चलाते’ विष बुझी’ नस्तर कहे बग़ैर |
जीवन सदैव धन्य हो’ चौकस विवेक हो
आती विपत्तियाँ सभी’ अक्सर कहे बग़ैर |
ये ज़िंदगी है’ चार दिनों की, अधिक नहीं
जाते सभी ‘प्रसाद’ रुलाकर कहे बग़ैर |

कालीपद प्रसाद’

परिचय - कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अंधरे से उजाले की ओर" मुक्तक एवं काव्य संग्रह २०१५ में प्रकाषित | साझा गीतिका संग्रह "गीतिका है मनोरम सभी के लिए " २०१६ | उपन्यास "कल्याणी माँ " २०१६ में प्रकाशित |