कविता

हम ज़िंदा कब थे?

हम ज़िंदा कब थे?
अगर हम ज़िंदा होते तो
किसी औरत को बलात्कार नहीं सहते
किसी व्यक्ति की निंदा नहीं करते
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते
न कि उसमे भागीदारी बनते
अगर हम ज़िंदा होते तो
डॉनेशन लेकर विध्या की अपमान नहीं करते
लड़कियों को कोख में नहीं मारते
देहज जैसा पाप नहीं करते
अगर हम ज़िंदा होते तो
किसी नारी को कम नहीं समझते
अपने ऊपर घमंड नहीं करते
दूसरो की सहायता करते
अगर हम ज़िंदा होते तो
भेदभाव नहीं करते
माँ-बाप को वृध्दाश्रम नहीं भेजते
अंधविश्वास नहीं फैलाते
इसीलिए तो मैं कहता हूँ
हम ज़िंदा कब थे?

श्रीयांश गुप्ता

परिचय - श्रीयांश गुप्ता

पता : श्री बालाजी सलेक्शन ई-24, वैस्ट ज्योति नगर, शाहदरा, दिल्ली - 110094 फोन नंबर : 9560712710

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