आए बादल

वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

जी भर बादल देख न पाए
जाने किधर गुम हो गए बादल
मन-मयूर आतुर था नृत्य को
नृत्य देख न पाए बादल
वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

शुक्र है तुम आए तो हो
इतना ही काफी है बादल
दूर कहीं कूके है कोयल
लगता फिर बरसोगे बादल
वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

कभी बरसते ऐसे जैसे
कभी नहीं थम पाओगे
आज न जाने हो किस सोच में
कब तक यूं तरसाओगे?
वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

चाहे थम-थमकर ही बरसो
मत करना तुम कल या परसों
कल तो कभी भी आ नहीं पाया
देखी हमने राह है बरसों
वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

अति की भली न बरखा होती
अति की भली न होती धूप
इसका ध्यान न रखोगे तो
बिगड़ेगा धरती का रूप
वक्त से पहले आए बादल
खुलकर बरस न पाए बादल-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।