लघुकथा – शगुन

त्यौहार पर रंग बिरंगी लाइट सीरीज से सजावट कर शानदार पार्टी चल रही थी, पर अचानक पावर कट से घर में अंधेरा हो गया। रंग में भंग से सब दुःखी थे, बालकनी के कोने में चारपाई पर पड़ी अम्मा बुदबुदाई, ‘‘मैंने पहले ही कहा था, शगुन के पांच दीपक के लिए, पर मुझ बूढ़ी की कौन सुनता है, मोमबत्ती तक तो हैं नहीं घर में, आधुनिक हैं सब।‘‘

— दिलीप भाटिया

परिचय - दिलीप भाटिया

जन्म 26 दिसम्बर 1947 इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और डिग्री, 38 वर्ष परमाणु ऊर्जा विभाग में सेवा, अवकाश प्राप्त वैज्ञानिक अधिकारी