धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सावन मनभावन महीना

सावन का महीना बहुत पावन महीना कहलाता है। चारों ओर हरियाली और बारिश की हल्की -हल्की फुँआरें मन में एक नई उमंग पैदा करती हैं क्योंकि हमें भयंकर ताप से मुक्ति मिलती है। चारों ओर से बम-बम भोले का जयकारे से मन और भी प्रफुल्लित हो जाता है। इस महीने में शिव की पूजा का बड़ा महत्व होता है। जो व्यक्ति पूरे साल किसी कारणवश पूजा ना कर पाये और इस महीने क्ष्रद्धा से “ ऊँ नमः शिवाय “ का जप, और जल अर्पित करें तो उसकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

अगर संभव हो तो भोलेनाथ को बेलपत्र, सफ़ेद पुष्प, पंचाम्रत ( दूध,घी,शहद,शक्कर,और दही )से स्नान करायें तो और भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। कोई रोग बहुत दिनों से पीछा नहीं छोड़ रहा हो तो काले तिल जल में डालकर जलाभिषेक करें ,गन्ने के रस से कराना भी श्रेयकर होता है। साथ में महामृत्युंज्य का मंत्र निरंतर बोलते रहें तो और भी गुणकारी हो जाता है। बाबा भोलेनाथ को जनेऊ भी पहनाएँ, दूर्वा , भॉग, बेल , धतूरा, सफ़ेद मिठाई, पुष्प अर्पित करें ।गृहस्थ जीवन को ख़ुशहाल बनाने के लिये शिवजी के पूरे परिवार की पूजा करना श्रेयकर होता है।

अगर मंदिर जाना संभव ना हो तो घर में ही शिवलिंग बनाकर पूजा कर सकते हैं। भभूत भी लगाना ना भूलें जो अगरबत्ती से बनती है जिसे हम आसानी से घर में ही बना सकते हैं। बाद में जल को पेड़ में चढ़ा दें। कामकाजी लोंगों के लिये अगर इतनी पूजा करनी सम्भव ना हो तो काम पर जाते हुए ही मंत्र बोलते रहें।
सावन के महीने में साग और बैंगन खाने व दूध पीने से बचना चाहिये वरना हम अपच के शिकार बन जाते हैं।
चारों ओर से कॉवड़ ले जाते हुए लोग , जगह – जगह पर टेंट , सब मन को बहुत भॉते हैं

पहले इस महीने में चारों ओर झूले पड़े होते थे। अब सिर्फ़ गाँव तक ही सीमित रह गये हैं शहरों में तो देखने को भी नहीं मिलते। घेवर तो पूरे महीने आप खा सकते हैं परन्तु पहले वाली बात अब कहाँ ? क्या दिन थे वो जब मॉ आम के पेड़ पर रस्सी से झूला बनाती और गद्दी से बैठने का स्थान ! बहुत याद आते हैं वो दिन….

हरियाली तीज, रक्षाबंधन भी इसी महीने के त्यौहार हैं ।जिसमें हॉथों पर मेंहदी लगाकर ,पूरा शृंगार करके सुहागिनें सावन के मनभावन गीत गाती हैं। परन्तु आज की भागदौड़ वाली ज़िन्दगी में ऐसा कर पाना असम्भव सा प्रतीत होता है। भाईयों के हाथ पर राखी की शोभा देखते ही बनती है !

मच्छरों , कीट -पतंगों से बचाव रखना भी अति आवश्यक है इस समय पर। बर्खा आने पर जगह – जगह पानी इकट्ठा होने से ऐसा होता है। हमें साफ़ – सफ़ाई का पूरा ध्यान रखना चाहिये। तभी हम इस महीने का भरपूर आनंद ले सकते हैं। सावन मनभावन महीना लाये ख़ुशियाँ हज़ार ………

नूतन ( दिल्ली )

*नूतन गर्ग

दिल्ली निवासी एक मध्यम वर्गीय परिवार से। शिक्षा एम ०ए ,बी०एड०: प्रथम श्रेणी में, लेखन का शौक