गीतिका/ग़ज़ल

दुश्मनों तक भी मुहब्बत भेजनी तो चाहिये

दुश्मनों तक भी मुहब्बत भेजनी तो चाहिये अब जहां से दूर नफ़रत भेजनी तो चाहिये जो हमें अजदाद ने सौंपी अमानत अब हमें पीढ़ियों तक वो अमानत भेजनी तो चाहिये सुन रहे हैं मौन अधरों की शिकायत हम अगर कुर्सियों तक वो शिकायत भेजनी तो चाहिये नफ़रतें फैला रहे हैं जो धरम के नाम पर […]

गीत/नवगीत

पावन सावन में भक्तों को

पावन सावन में भक्तों को, शिव शंकर इतना वर देना। जो भी दर पर शीष झुकाएं, उनके कष्ट दूर कर देना।। देव दया के हो तुम ही तो, सकल श्रृष्टि के संचालक हो। तुम ही पालक सकल विश्व के, और तुम्ही तो संघारक हो।। हम सब आए शरण तुम्हारी, हाथ हमारे सर धर देना… जो […]

भजन/भावगीत

शिवशंकर की महिमा

मेरे शिवशंकर की महिमा अपरम्पार  जो शिव का स्मरण करते हैं, उनका बेड़ा पार-मेरे शिवशंकर की————– 1.जटाजूट में सोहे गंगा मस्तक पर है प्यारा चंदा सर्पों के आभूषण सोहें, सर्पों की है माल-मेरे शिवशंकर की————– 2.वामभाग में गौरां सोहे गोद में गणपत मन को मोहे नन्दिगण पे करें सवारी, कैलाशों में वास-मेरे शिवशंकर की————– 3.आक-धतूरा […]

लघुकथा

टिफीन और डिनर

वही डेढ़-दो बज रहे होंगे।कबाड़ी के दुकान में काम कर रहा दुखना मालिक से बोला-“मालिक खाए खातिर 50₹ दे देते।” मालिक- “खाना…..! होटल में खाएगा! घर से टिफीन लेकर क्यों नहीं आया?” दुखना- “मालिक, कनिया के बोखार लागल रहै खाना नै बनैलकै।” मालिक-बहाना छोड़, आ ई बता कि एक टाईम 50₹ का खाएगा तो घर […]

गीतिका/ग़ज़ल

तुम्हारा नाम लिखता हूं

तुम्हारा नाम लिखता हूं मैं सुबहो शाम लिखता हूं। तुम्हारे इन लवों को मैं गाफ़िल-ए-जाम लिखता हूं। धरा पर तुमको तो अपना मैं चारों धाम लिखता हूं। रुप की राशि तुम प्रिये मैं तुमको काम लिखता हूं। समझ लो दिल की बातें तुम ‘अरुण’ मैं पयाम लिखता हूं। ©डा.अरुण निषाद

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कैसी पलकों में है ये नमी कुछ तो है। अब  लगे ज़िंदगी में कमी कुछ तो है। बेवज़ह  कोन  जीता  है इसको  यहां, आदमी  के  लिये  ज़िंदगी कुछ तो  है। चढ़ के उतरे कभी फिर उतर कर चढ़े, ताप  है आजकल मौसमी कुछ तो है। तुझपे चलती  रही तुझसे होकर  शुरू, बात  आके वो तुझपे  […]

लघुकथा

इंसानियत पुरस्कृत हुई

डॉक्टर भारत वटवानी को रैमन मैगसायसाय अवॉर्ड प्राप्त होने की सूचना मिली तो स्वाभाविक रूप से वे हर्षित और उत्साहित तो थे ही, उनको पिछले कई सालों की घटनाएं भी याद आने लगीं. किसी भी दुःखी इंसान को देखकर वे मन से बहुत दुःखी होते थे और उसके दुःख-दर्द को दूर करने की कोशिश में लग […]

राजनीति

लेख– सुशासन बाबू के राज में सुशासन है, कहाँ?

सबके के अपने दावे होते हैं। फ़िर वह केंद्र की सरकार हो, या राज्य की रहनुमाई व्यवस्था। आज के वक्त में राजनीति में कोई सुशासन पुरुष बन बैठा है, तो कोई विकास पुरूष। पर जब कोई ज़मीनी हक़ीक़त सामने आती है। ऐसे में फिर सभी वादों और दावों की कलई खुलनी शुरू हो जाती है। […]

सामाजिक

हमारी प्रगति की दास्तान

हमने कुछ वर्षों में इतनी उन्नति कर ली है की यदि आज रावण दुर्योधन कंस आ जाएँ तो हमारी उन्नति देखकर दांतों तले उंगलिया दबा लेंगें । वो बहुत इतराते थे की हमारे जैसा कौन होगा ? काश वो आज आएं और हमारी उन्नति देखें । महाभारत का युद्ध तो अठारह दिन तक चला था […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

सावन पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे हिलोर || कजरारे घन आय के , बरसावें जब नीर | तपती धरती खिल उठे ,मिटे जगत की पीर […]