Monthly Archives: August 2018




  • लघुकथा – वर्जित

    लघुकथा – वर्जित

    युगों बाद युगल धरती की ओर आया था। स्त्री- ये कीड़े मकोड़े से क्या दिख रहे? एक दूसरे को मारते-काटते। पुरुष- हमारी संतान। स्त्री- नहीं ऐसा नहीं हो सकता।हमारी सन्तान में इतना काम, क्रोध, नफरत? पुरुष-...



  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान। मोबाइल के स्क्रीन पर, दिखता सकल जहान। बिना रुकावट मान लो, खुल जाते हैं द्वार- चाहा अनचाहा सुलभ, लिखो नाम अंजान॥-1 बिकता है सब कुछ यहाँ, पर न मिले...

  • बेटी की चाहत

    बेटी की चाहत

    बेटी की चाहत [‘मुझे सब छोड़ देंगे’के पहले की कहानी] काफी देर हो गई। मुझें अब चिंता हो रही है। मैंने एक बार फिर बालकनी में कदम रखा और नीचे देखा। गेट के पास पड़े बुरी...

  • रास्ते अपने-अपने

    रास्ते अपने-अपने

    “क्या भाभी आप भी न! अपने लिए काँटों वाली डगर चुन लीं… छोटे देवर की व्यंग्य भरी आवाज सुन, विभिन्न तरह के फूलों से सजी दुकान के उद्घाटन पर आये अतिथियों से घिरी मेघा मुस्कुराई… “उस...