गीतिका/ग़ज़ल

प्यार पूजा है ज़िन्दगानी है

आग नफ़रत की अब बुझानी है | प्यार की हर शमा जलानी है | प्यार से फूल जहाँ में खिलते – प्यार पूजा है ज़िन्दगानी है | दिल मेरा अब नहीं रहा मेरा – मेरे दिलबर की मेहरबानी है | मेरे महबूब मेरे जाने जहाँ – तुझसे रंगी मेरी कहानी है | इश्क धड़कन है […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्यार में वो अश्क दामन भर गये

31/8/18 प्यार में वो अश्क दामन भर गये | हाय यों लगता निकल गौहर गये | बेसबब भटका किये हम दर ब दर- बन्द पलकें ख्वाब सारे मर गये | लफ्ज़ सारे हो गये खामोश अब – अश्क आँखों से भी सारे झर गये | मेरा कुछ बाकी नही मुझमें रहा – वो गये क्या […]

सामाजिक

किसी दूसरे गृह के प्राणी नहीं हैं किन्नर

जब भी हम किसी किन्नर को देखते हैं तो अचानक से हमें ऐसा क्यों लगता है कि ये किसी दूसरे गृह से आये हुए हैं | ये हमारे समाज का हिस्सा नहीं हैं | लोग किन्नरों को अलग नजरों से क्यों देखते हैं? यह सोचने, मनन करने योग्य विषय है | शुरू से ही हमें […]

लघुकथा

लघुकथा – वर्जित

युगों बाद युगल धरती की ओर आया था। स्त्री- ये कीड़े मकोड़े से क्या दिख रहे? एक दूसरे को मारते-काटते। पुरुष- हमारी संतान। स्त्री- नहीं ऐसा नहीं हो सकता।हमारी सन्तान में इतना काम, क्रोध, नफरत? पुरुष- बीज हम दोनों ने ही बोया था। ईश्वर की चेतावनी भूल कर। बोया पेड़ बबूल का…. — निवेदिता

यात्रा वृत्तान्त

यात्रा संस्मरण – शिवाना समुद्रम

जब जैन धर्म में चतुर्मास शुरू होता मुझे प्रवास के लिए समय मिलता सदा। इस वर्ष फिर महाराष्ट्र, कर्नाटक जाना हुआ। इसी श्रृंखला में बंगलुरू से 135 किलोमीटर की दूरी पर मंड्या के छोटे से गाँव मलवल्ली में शिवसमूद्रम प्रपात जाना हुआ। शिव समुद्रम प्रपात कावेरी नदी पर है ।98 मीटर की ऊँचाई से जल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

जन्माष्टमी पर लगता है विशाल मेला – नरहड़ दरगाह शरीफ

राजस्थान के झुन्झुनू जिले के चिड़ावा शहर से 7 कि. मी. दूरी पर स्थित साम्प्रदायिक  सदभाव का  प्रतीक  धार्मिक स्थल नरहड़ है।नरहड़  में हजरत शक्करबार की दरगाह है ।अजमेर के गरीब नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को सूफियों का बादशाह कहा गया है उसी प्रकार नरहड़ पीर बाबा की दरगाह को बागड़ की धनि […]

मुक्तक/दोहा

“मुक्तक”

फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान। मोबाइल के स्क्रीन पर, दिखता सकल जहान। बिना रुकावट मान लो, खुल जाते हैं द्वार- चाहा अनचाहा सुलभ, लिखो नाम अंजान॥-1 बिकता है सब कुछ यहाँ, पर न मिले ईमान। हीरा पन्ना अरु कनक, खूब बिके इंसान। बिन बाधा बाजार में, बे-शर्ती उपहार- हरि प्रणाम मुस्कान सुख, सबसे […]

कहानी

बेटी की चाहत

बेटी की चाहत [‘मुझे सब छोड़ देंगे’के पहले की कहानी] काफी देर हो गई। मुझें अब चिंता हो रही है। मैंने एक बार फिर बालकनी में कदम रखा और नीचे देखा। गेट के पास पड़े बुरी तरह भीगे हुए एक कुत्ते के अलावा वहां कहीं भी कोई भी नहीं था। लैम्प पोस्ट के नीचे बारिश […]

लघुकथा

रास्ते अपने-अपने

“क्या भाभी आप भी न! अपने लिए काँटों वाली डगर चुन लीं… छोटे देवर की व्यंग्य भरी आवाज सुन, विभिन्न तरह के फूलों से सजी दुकान के उद्घाटन पर आये अतिथियों से घिरी मेघा मुस्कुराई… “उस दिन के उस दिन, फूलों का वितरण नहीं हुआ तो मुरझाये फूलों का क्या करेंगी आप…?” “फूल मुरझाएंगे, किसी […]

कविता

फूलों की कविता-14

                                                फूलों की 21 कविताएं से संग्रहीत 14. नियत समय पर होता है अपनी खुशबू फैलाने को, फूल समय पर खिलते हैं। संकेत समय का मिल जाए जब, वृक्ष तभी तो फलते […]