चूहे

चूहे दिखने में भले ही छोटे हों या बड़े, होते बहुत चालाक हैं. आपको बचपन में सुनी हुई कहानी याद होगी. एक छोटा-सा चूहा शेर की गिरफ़्त में आ गया. चूहे ने अपने बचाव के लिए निहोरे किए और भविष्य में कभी उसके काम आने का वादा भी. शेर ने उसे छोड़ दिया और एक बार शिकारी के जाल में फंसने पर चूहे ने ही जाल को कुतरकर उसे बचाया.

 

फिर चुहिया की चुहिया वाली कहानी भी आपको अवश्य याद होगी. एक तपस्वी के पास एक चुहिया आ गई. वह अपने तप के बल से अपनी बेटी जैसी चुहिया की मनचाही शादी करवाना चाहता था. चुहिया सबसे शक्तिशाली पुरुष के साथ शादी करना चाहती थी. सूर्यदेव, बादल देव, पवनदेव, पर्वतदेव सब उसको अपने सामने बौने लगे. पर्वत ने कहा- “चूहा मुझसे भी श्रेष्ठ है. वह मुझे भी छेदकर बिल बनाकर उसमें रहता है.” फिर वह फिर चुहिया की चुहिया बनी और चूहे से शादी की.

 

बचपन में ही हमने एक चुटकुला सुना था-
”एक आदमी ने चूहे को पकड़ने के लिए चूहेदान में पनीर के बजाए पनीर की तस्वीर लगा दी.
चूहा भी चालाक था, वह भी उसमें चूहे की तस्वीर लगाकर भाग निकला.”

 

 

बचपन के चूहों के किस्से तो अनेक हैं, अब आज के किस्सों पर आ जाते हैं. कुछ समय पहले एक वकील साहिबा ने मुंबई की ट्रेन में चूहे दिखने की शिकायत की और वकील को 19 हजार रुपये मुआवजा मिल गया. वकील ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत की थी. फोरम ने खराब सर्विस के लिए सेंट्रल रेलवे को जिम्मेदार ठहराया है. फोरम ने कहा कि लोगों ने अच्छी सुविधाओं के लिए पैसे दिए हैं, उन्हें अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए. लगी हाथ वकील ने ट्रेन की सफाई, स्टाफ और टिकटचेकर की बेरुखी और लापरवाही, उन्हें ट्रेन में जो खाना दिया गया, उस पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए. रेलवे ने सभी शिकायतों को गलत बताया और कहा कि सफाई समय से होती है, पर जुर्माना तो लग ही गया. चूहे ने दिलवा दिए 19 हजार रुपये.

आप ये न समझें, कि ‘नोटबंदी’ सिर्फ हम कर सकते हैं, चूहे भी कर सकते हैं. जी हां, ATM के अंदर चूहों ने कर दी ‘नोटबंदी’, CCTV में कैद हुआ नज़ारा. ‘नोटबंदी’ करके चूहों ने 12 लाख रुपये के नोट काट डाले. असम के तिनसुकिया जिले का यह किस्सा है.

 

असम में ही क्यों यू पी में भी चूहे बेखौफ हैं. नोएडा सेक्टर-74 स्थित ग्रैंड अजनारा हेरिटेज सोसायटी में इन दिनों सैकड़ों चूहों ने इस कदर आतंक मचा रखा है, कि हर रोज 10-12 लोगों को ऑफिस से छुट्टी करनी पड़ रही है. ये चूहे कारों के बोनट में घुसकर वायरिंग काट देते हैं. पिछले कुछ महीने में ये 300 से भी ज्यादा कारों की वायरिंग काट चुके हैं। लोग ऑफिस जाने के लिए बेसमेंट में आकर कार स्टार्ट करते हैं तो वह स्टार्ट ही नहीं होती. इसके बाद मकैनिक को बुलाया जाता है और ऑफिस जाने के बजाय पूरा दिन कार ठीक कराने में लग जाता है. मेंटिनेंस हेड का दुखड़ा सुनिए-

 

“यह आम चूहे नहीं हैं मोटे वाले जंगली टाइप के चूहे हैं जो कारें खराब कर रहे हैं. मामला हमारे संज्ञान में है, लेकिन हम भी इसमें क्या कर सकते हैं. हमारे स्टाफ ने कई जगह चूहेदानी भी लगाई है लेकिन इतने ज्यादा चूहे पैदा हो गए हैं कि हम चाहकर भी इसमें कुछ कर नहीं पा रहे.”

 

-संजय सिन्हा, मेंटिनेंस हेड, ग्रैंड अजनारा हेरिटेज, सेक्टर-77

 

 

चलते-चलते चूहे का एक मजेदार किस्सा-

चोरी करते रंगे हाथ पकड़े जाने पर चोरों का जुलूस निकालने के किस्से तो हमारे देश में आम हैं, लेकिन चीन में एक चूहे को स्टोर से चावल चुराने की ऐसी ही सजा ने सबको हैरान कर दिया है. वाकया गुआंगजू का है. यहां ट्रॉली से चूहे को बांध दिया गया और उसपर एक चिट लिखकर चिपका दी गई कि ‘आगे से ऐसा नहीं करूंगा’.

अब आपको अंदाजा लग गया होगा न, कि चूहे कितने चालाक, कितने शक्तिशाली होते हैं! आपके पास भी ऐसे अनेक किस्से होंगे, कामेंट्स में हमारे साथ शेयर कीजिए तथा अन्य किस्से भी पढ़िए.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।