48 वसंत से कुछ नहीं होता…

कांग्रेस दल के राष्ट्रीय मुखिया राहुल गांधी ने जिस तरह संसद में प्रधानमंत्री पर पहले आरोपों का बयानी हमला किया, फिर खड़े होने को बाध्य किया और बाद में गले लगने के नाम पर जो अपरिपक्वता दिखाई है, वह आज भी यह साबित करती है कि 48 वसंत पार कर चुके इस चिराग में अभी भी सकारात्मकता की लौ नहीं आई है। देश के प्रधानमंत्री के प्रति उनकी देह भाषा और हाव-भाव हमले से अधिक ख़ुद के लिए हास्यास्पद हालात हैं। संसद जैसे सर्वोच्च सदन में निरन्तर प्रमुखता से उपस्थित होने के बाद भी श्री गांधी का यह व्यवहार उनके दल सहित वरिष्ठ नेताओं के लिए भी बेहद स्तरहीन एवं चिंताजनक है। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि राहुल गांधी गम्भीरता के नाम पर आज भी खाली बर्तन हैं। इन्हें निश्चित ही वरिष्ठों के सतत मार्गदर्शन रुपी परिपक्वता की जरूरत है, वरना ऐसा आगे भी संभंव है। आश्चर्य इस बात पर भी है उनके जो सलाहकार हैं, क्या वे ऐसी सलाह ही देते हैं, और ये सोचकर (?) अमल भी कर लेते हैं। यदि ये उनकी सलाह नहीं है तो इस तरह का ख़ुद का ज्ञान भी स्वयं और कांग्रेस दल के लिए घातक है। सोनिया गांधी को भी यह समझना होगा कि दल में उपाध्यक्ष से अध्यक्ष तक आने वाले राहुल के सलाहकारों की सलाह से कांग्रेस संगठन का निरंतर नुकसान हो रहा है। क्या आप 48 साल से ऊपर के किसी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि वह प्रधानमंत्री जैसे पद पर आसीन(कोई भी व्यक्ति या दल) व्यक्ति को ऐसे बेरुखी से खड़े होने को कहेगा ? यदि राहुल गांधी की जगह वरिष्ठ नेता श्री चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेई, पूर्व प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा एवं श्री गुजराल भी होते तो ऐसा नहीं करते, क्योंकि वे पद की गरिमा समझते हैं, और अगर श्री आडवाणी या श्री गुजराल ऐसा करते तो समझा जा सकता था, कि कहीं समानता संभंव है, लेकिन राहुल गांधी ने ऐसा करके अपने लायकपन की गरिमा गिराई है। सोचा जाना चाहिए कि क्या कल को कांग्रेस का कोई सदस्य प्रधानमंत्री पद पर इसी तरह आसीन होता तो क्या उसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी या कोई अन्य प्रधानमंत्री को उठने को बोल सकता था, पर राहुल गांधी इतने समय में इतना भी नहीं समझ पाए।
अब बात मुख्य मुद्दे की भी तो, इन्होंने संसद में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाकर पहली गलती की, क्योंकि संख्या बल नहीं था, तो दूसरी गलती देह भाषा से की है। इससे बाहर तो ठीक, संगठन में ही इनकी किरकिरी हो रही है।
यह बात तो तय है कि है सिर्फ़ बड़े परिवार में ही होने से आप योग्य और प्रतिभाशाली नहीं हो सकते हैं, इसके लिए आपको ख़ुद को तराशना होगा, किसी को अपना गुरू बनाना होगा, मुद्दों पर तार्किक सोच बनानी होगी और हर कार्यक्षेत्र की गम्भीरता भी समझनी होगी, वरना आपको भी राहुल गांधी जैसा होना पड़ सकता है।
इनके हालिया बचकानेपन से कभी-कभी यह भी विचार आता है कि कहीं इनके सलाहकार जान-बूझकर तो इनकी हंसी नहीं उड़वाते हैं। किसी सबसे पुराने राष्ट्रीय दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने व्यक्ति से सबको गम्भीरता की अपेक्षा ही रहती है, ऐसे में ऐसी हरकतें अन्य नेताओं हीं नहीं, विशेष रुप से कार्यकताओं को कमजोर करती हैं। अगर श्री गांधी ऐसा ही करते रहे तो निश्चित ही भविष्य में बहुत मुश्किल आनी है। कोई भी वर्तमान सहयोगी दल या जुड़ने वाला दल राष्ट्रीय अध्यक्ष को भविष्य में किस तरह झेलेगा, यह कांग्रेस मार्गदर्शक मंडल और संरक्षक सोनिया गांधी को सोचना होगा। अगर इन्होंने समय रहते व्यवहार में अपनी काबिलियत साबित नहीं की तो केवल इनका दल ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के साथ गठबंधन की सारी संभावनाएं रसातल में पहुंच जाएगी।
ऐसा नहीं है कि राहुल बाबा ने पहली बार इस तरह की हरकत की है, इसके पहले भी राहुल गांधी ऐसी बचकानी हरकतें कर चुके हैं जिनसे कहीं-न-कहीं समय-असमय दल की बेहद थू-थू हुई है। अब जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं तो सबको उम्मीद और उत्साह इनसे ही है। ऐसे में राहुल गांधी संसद जैसे सर्वोच्च सदन में इस तरह की स्तरहीनता करते हैं तो निश्चित रूप से यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि राहुल को अभी और बड़े होने की जरूरत है, भले ही उम्र में वे बालिग हों, पर राजनीतिक उम्र अभी बहुत छोटी लगती है।
मुझे तो आश्चर्य होता है कि संसद में कोई व्यक्ति सांसद जैसे पद और दल के प्रमुख पद पर आसीन होकर झप्पी देने और आंख चमकाने जैसे सार्वजनिक कारनामे कैसे कर सकता है। इससे पहले सोशल मीडिया से देशभर में राहुल गांधी ‘पप्पू’ रुप सहित विभिन्न नामों से चर्चित हैं, जिनसे इनकी रोज खिल्ली उड़ती है। संगठन ने इससे परेशान होकर राहुल गांधी की छवि को बदलने की कोशिश की थी लेकिन, वह बदलती नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि ये तो स्वयं ही खुद का नुकसान करने पर तुले हुए हैं। सोनिया गांधी को चाहिए कि वह राहुल गांधी को कम से कम संसद में रहने के व्यवहार का तरीका तो सिखाएं।
 अजय जैन ‘विकल्प’

परिचय - अजय जैन 'विकल्प'

विशेष वरिष्ठ संवादददाता-इंदौर ईमेल ajayjainvikalp@gmail.com मो संपर्क-9770067300