ट्रेड वॉर के बहाने से

वॉर से कभी किसी को लाभ हुआ है? नहीं न! हमारा भी यही विचार है. फिर बचपन से ही हमको यही सिखाया जाता रहा है, कि वॉर-रार-तकरार से नुकसान-ही-नुकसान है. अब देखिए न! महाभारत का युद्ध हुआ, सबका नाश हो गया और नाश हो गया हमारे उन स्वचालित हथियारों का भी, जो भारतीयों ने बहुत मेहनत से बनाए थे. प्रथम विश्वयुद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध में भी कितना खून-खराबा और जान-माल का नुकसान हुआ, आप भलीभांति जानते हैं. लेकिन वॉर से किसी का भला भी हो सकता है, यह भी संभव हो सकता है.

6 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका ने जापान के सैन्य केंद्र हिरोशिमा पर बमबारी की थी. लिटिल बॉय परमाणु बम ने नाम के उलट बड़ी तबाही मचाई थी. इसका वजन 50 हजार किलोग्राम था. धमाके से तुरंत शहर का 90% भाग नष्ट हो गया और 80 हजार लोग मर गए. 5 साल के अंदर रेडिएशन के कारण यह संख्या 2 लाख तक पहुंच गई.

बचपन में दो बिल्लियों और एक बंदर की कहानी सुनी थी. एक बिल्ली को कहीं से रोटी का टुकड़ा मिला. दूसरी बिल्ली उसे झपटने लगी और लड़ते-लड़ते न्याय के लिए एक बंदर के पास पहुंचीं. बंदर भी कौन सा दूध का धुला हुआ था, उसने चालाकी से उनकी रोटी हड़प ली. बंदर आज तक खीसें निपोरकर अपनी इस जीत पर हंसते हुए दिखाई देते हैं.

यह तो बचपन की कहानी थी, लेकिन आज की हकीकत देखिए. सड़क पर लड़े दो पति, महिला गई तीसरे के संग. पुलिस ने बताया सिद्धाराजू और मूर्ति नामक दो शख्स बीच सड़क पर ही मुक्के और घूंसों की बौछार कर रहे थे. दोनों शशिकला नामक महिला के लिए लड़ रहे थे, लेकिन महिला इन दोनों को लड़ता छोड़ तीसरे शख्स के साथ चली गई. मौके पर पहुंची पुलिस को शशिकला ने बताया कि दोनों मेरे दोस्त हैं और एक-दूसरे से जलते हैं. उसने कहा कि वह दोनों में से किसी से भी शादी नहीं करेगी. इतने में शशिकला का एक और ‘दोस्त’ आ गया और वह उसके साथ चली गई. क्या बात है!

यह तो सड़क पर दो पतियों की रार थी, अमेरिका और चीन जैसे दो देशों के बीच ट्रेड वॉर होने लगे तो किसका लाभ हो सकता है? निश्चय ही अमेरिका और चीन का तो नहीं, पर इससे भारतीय उत्पादों के लिए बढ़ सकते हैं मौके. यह कहना है CII यानी कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) का. इससे कुछ भारतीय उत्पाद और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे. चैंबर की तरफ से किए गए विश्लेषण में कहा गया है कि भारत को मशीनरी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, वीइकल और ट्रांसपोर्ट पार्ट्स, केमिकल्स, प्लास्टिक और रबर के उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

CII का यह भी कहना है, ‘चीन और अमेरिका जिस तरह एक दूसरे के यहां से आयात पर शुल्क बढ़ा रहे हैं, उसे देखते हुए भारत को इन दोनों देशों के बाजारों में निर्यात बढ़ाने के लिए तमाम वस्तुओं पर फोकस करना चाहिए.’ चैंबर ने कहा कि अमेरिका को भारत से प्रमुख तौर पर निर्यात होने वाली वस्तुएं उस लिस्ट में शामिल हैं जिन पर यूएस ने टैरिफ बढ़ा दिया है, मसलन- पंप्स, मिलिटरी एयरक्राफ्ट के पुर्जे, इलेक्ट्रोडायग्नोस्टिक उपकरणों के पुर्जे, 1500 से 3000 सीसी तक के पैसंजर वीइकल आदि.

CII का मानना है कि इन श्रेणियों में अमेरिका को भारत के मौजूदा निर्यात को देखते हुए रक्षा और ऐरोस्पेस सेक्टर से जुड़े पार्ट्स, वीइकल और ऑटो पार्ट्स, इंजिनियरिंग के सामानों आदि में और ज्यादा निर्यात की क्षमता है. चैंबर ने कहा, ‘अपैरल और टेक्स्टाइल, फुटवियर, खिलौने, गेम्स और मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग भारत में प्रतिस्पर्धात्मक उद्योग बन रहे हैं और इन्हें प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है.’

तो साहब इस ट्रेड वॉर से लाभ उठाकर घरेलू उद्योग और साथ में चिह्नित उत्पादों के घरेलू उत्पादन में नई तकनीक को जोड़ना महत्वपूर्ण है. इसके लिए कमर कस लीजिए, अपनी क्षमता को पहचानिए, आगे आइए और अपने साथ देश को भी समृद्ध बनाइए.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।