नहाने का पर्व

सुना है ”नहाने का पर्व” आने वाला है. सुरेश ने तनिक चिंतित होकर कहा.
”नहाने का भी कोई पर्व होता है क्या?” महेश की जिज्ञासा थी.
”तुझे पता नहीं है क्या?”
”नहाना तो रोज होता है, इसमें पर्व की बात कहां से आ गई?”
”क्या तुम रोज नहाते हो?” सुरेश ने आश्चर्य चकित होकर पूछा.
”इसमें आश्चर्य वाली कौन सी बात है? क्या तुम रोज नहीं नहाते?”
”मैं तो संडे-के-संडे नहाता हूं, उसमें भी कभी बारिश का बहाना, कभी ठंड का बहाना, कभी हवा का बहाना बनाकर छुट्टी मना लेता हूं और मौज करता हूं. तुम्हें नहाने के पर्व का पता नहीं है क्या?” सुरेश ने प्रश्न उछाला.
”मुझे तो नहीं पता.”
”तुम्हें याद नहीं है कि हमारे स्कूल में गंगा स्नान की छुट्टी हुआ करती थी?” सुरेश ने अपने प्रखर सामान्य ज्ञान का परिचय दिया.
”हां याद है, वो तो इसलिए कि लड़कियों के स्कूल में तीज की छुट्टी होती थी, उसके बदले हमें गंगा दशहरा की छुट्टी मिल जाया करती थी. इससे नहाने का क्या ताल्लुक?”
”तुम तो निरे बौड़म हो. पता नहीं तुम उस दिन नहाते थे या नहीं, मुझे तो उस दिन यह कहकर जबरदस्ती नहलाया जाता था कि आज तो छुट्टी ही नहाने के लिए मिली है, सो उस दिन मेरा कोई बहाना नहीं चलता था.” तपती गर्मी के दिनों में स्नान की बात याद कर सुरेश को कंपकंपी छूट रही थी. ”अब तो नहाने का पर्व कुंभ आने वाला है, फिर तो नहाना ही पड़ेगा न!”
”अच्छा, तो उस नहाने के पर्व कुंभ की बात कर रहे हो?” महेश की समझदानी सुरमेदानी की गर्दन जैसी पतली थी, सो देर से समझा था, ”पर वो तो 2019 में आने वाला है, तुम्हें अभी से चिंता लगी है?”
”क्या बात कर रहे हो! 2019 कौन-सा एक सदी के बाद आने वाला है? 15 अगस्त आने वाला है, फिर रक्षा बंधन, उसके बाद सिलसिला चलेगा नवरात्रि-दशहरा-दिवाली-क्रिसमस और 2018 खत्म, लो आ गया 2019. सुना है नहाने के पर्व की तैयारियां बहुत जोर-शोर से चल रही हैं.”
”क्या सुना है?”
”नेहरू की तरह पीएम मोदी करेंगे कुंभ की सीधी निगरानी. अब पीएम खुद सीधी निगरानी करेंगे, फिर तो नहाना ही पड़ेगा न! चुगलखोर सीसीटीवी कैमरा चुगली करने में पीछे थोड़ी हटेंगे?”
”मोदी जी की तो हर छोटी-छोटी बात पर सीधी नजर होती है, इसमें कौन बड़ी बात है?”
”मुझे बड़ी-छोटी बात से क्या लेना-देना, मुझे तो नहाने की चिंता सता रही है.”
”इतना मत घबराओ, अब तक नहाने से तुम्हें कुछ नहीं हुआ, अब भी कुछ नहीं होगा. मोदी जी तो सबकी अच्छी बातों को स्वीकार करते हैं. आज से 65 साल पहले 1954 में प्रधानमंत्री के निर्देश पर कुंभ की तैयारियों के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई गई थी. इसमें सीआईडी के एसपी भी शामिल थे. 1954 में कुंभ के दौरान हर दिन की गतिविधियों की जानकारी सीधे पुलिस हेडक्वॉर्टर को भेजी जाती थी. वहां से जानकारियां पीएमओ तक भेजी जाती थीं. 2019 में भी होने जा रहे कुंभ को लेकर वर्तमान मोदी सरकार कुछ ऐसी ही तैयारी में है.”
”अच्छा मैं चलता हूं, नाहक ही तुम से नहाने के पर्व की बात छेड़ दी. मुझे नहीं पता था, कि तुम रोज नहाते हो. कल ब्रजेश से बात करके मजा आ गया था. वह भी मेरी तरह कभी-कभी नहाता है. वह कह रहा था- ”चुनावी साल में पड़ रहे इस कुंभ से बीजेपी को बड़ी उम्मीदें हैं. यही वजह है कि पार्टी और सरकार की तरफ से कुंभ की तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है. कुंभ के प्रचार-प्रसार से लेकर इसकी व्यवस्थाओं तक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर है.” 
”ठीक है, मैं भी चलता हूं. चुनाव के लिए पक्ष भी तैयारी में है और विपक्ष भी. वो अपना काम करें, हम अपना काम करें. तुम भी नहाने के पर्व के लिए नहाने का अभ्यास कर लो.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।