डेंगू बुखार को दूर भगाएं

        ‘डेंगू निरोधक दिवस’ पर विशेष

इधर भी डेंगू उधर भी डेंगू, 
जिधर भी देखें डेंगू ही डेंगू। 
इक नन्हा-सा संक्रमित मच्छर, 
दे सकता है भयंकर डेंगू॥ 
कूलर के गन्दे पानी से, 
इस मच्छर का पालन होता। 
रद्दी टायर टूटे बर्तन, 
गमलों में इसका घर होता॥ 
खुली नालियों-कुओं-तालाबों 
गड्ढों में यह बढ़ सकता है। 
फिर संक्रमित हो काटे अगर तो, 
डेंगू बुखार ये कर सकता है॥ 
साफ-सफाई रखें अगर हम, 
कुएं-तालाब में डालें दवाई। 
नाली ढकी हों रोज़ साफ हों, 
खिड़की-दरवाज़ों पे लगी हो जाली॥ 
कूलर की भी रखें सफाई, 
उसमें तेल केरोसीन डालें। 
कीटनाशक दवाई छिड़कें, 
अच्छी-अच्छी आदतें पालें॥ 
बुखार आए तो रक्त-जांच कराएं, 
डेंगू बुखार को दूर भगाएं। 
स्वस्थ जीवन का लाभ उठाएं, 
फूलें-फलें और खेलें-खाएं॥ 

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।