दूरदर्शिता

अभी हाल ही में हमने एक ब्लॉग लिखा था- ”गंगा क्यों मैली हो रही?” इस ब्लॉग के अंत में हमने लिखा था- ”कामेंट्स में आपके विचार जानना अपेक्षित है.”
दूर देश से हमारे एक सुधी पाठक-कामेंटेटर ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया में न केवल अपने विचार ही प्रकट किए हैं, अपितु समस्या पर अनेक नवीन विचारणीय बिंदु भी प्रस्तुत किए हैं. वे लिखते हैं-

”आदरणीय बहनजी, 1965 के असफल नंदा देवी अभियान की स्मृति अब भी मेरे स्मृतिपटल पर अंकित है. आपके लेख ने उसकी याद ताजा करवा दी. मैं उस समय भी जानता था की उस घटना को बहुत हल्के में लिया जा रहा है, जैसे आज कई घटनाओं को हल्के में लिया जा रहा है, जैसे- मॉब लिंचिंग, व्यर्थ की ट्रॉलिंग, इनकम टेक्स का दुरुपयोग, अपने विधायकों सांसदों की बड़ी-से-बड़ी गलती का बचाव, विपक्ष को खत्म करने की गंदी साजिशें, अपनी पार्टी की गलत बातों को बढ़ावा इत्यादि. एक दिन यही बातें उन्हीं को ले डूबेंगी जो आज इसे बढ़ावा दे रहे हैं. आश्रय स्थलों पर ऐसी घटनाओं का कारण है- राजनेताओं को आधे से अधिक वो पैसा इन स्थलों के संचालकों से वापस मिल जाना. यह राजनेताओं ओर असामाजिक तत्वों के बीच का खेल है जो पैसा इन आश्रय स्थलों को सरकार द्वारा दिया जाता है आधा वापस देने वाले की जेब में जाता है, इसलिये इन स्थलों की जांच नहीं की जाती. आज भी सरकारें कूड़े को फेंकने के लिये ठेकेदारों को पैसा देती हैं, जबकि कूड़े से गैस बनाने वाली कम्पनियाँ कूड़े को पैसे देकर खरीदने को तैयार हैं. यदि वो कूड़े को बेचने देंगी तो वो पैसा तो सरकार को देना होगा. यदि इसे ठेकेदार को कूड़े बेचने का ठेका दिया जायेगा तो उसमें से आधा ठेके पर देने वाले को मिलेगा. यही खेल आश्रय स्थलों का चल रहा है. पैसा आज प्रधान है मासूमों की कोई कद्र नही, इन मासूमों की जगह अपनी बच्चियों को रखकर सोचें.”

सच्चाई को इतने साहस से स्वीकारना सचमुच बड़े साहस की बात है. कितनी गहराई से इन्होंने समस्याओं का अध्ययन करके निचोड़ पेश किया है. इनमें से अनेक समस्याएं उभरकर सामने आती हैं, जिनका तुरंत संज्ञान लिया जाना और समाधान किया जाना आवश्यक है, अन्यथा जैसे 50 साल पहले खोए प्लूटोनियम का संज्ञान न लिए जाने की वजह से आज गंगा मैली व प्रदूषित हो रही है, उसी तरह शीघ्र ही समाज भी इतना प्रदूषित हो जाएगा, कि फिर संभाले नहीं संभलेगा. दूरदर्शिता इसी में है, कि समय रहते संभला जाए. आपका क्या विचार है?

प्रिय ब्लॉगर रविंदर भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. A stitch in time saves nine. अभी से सोचें-समझें-कदम उठाएं. अपनी साहसी लेखनी द्वारा हमें प्रोत्साहित करने के लिए तो हम आपके आभारी हैं ही. साथ ही हम आपकी दूरदर्शिता के भी कायल हैं. इसी तरह दूरदर्शी बने रहिए और समाज को जगाते रहिए.

 

लते-चलते दूरदर्शिता को बढ़ावा देता ताजा समाचार-

1965 में नंदा देवी पर खोया नाभिकीय डिवाइस, आज भी खतरनाक, हॉलिवुड इसपर बनाएगा मूवी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।