बाल कथा – फुदकु चिड़िया बड़ी ही प्यासी

आम के पेड़ पर एक सुंदर सा घोंसला था और उस घोंसले में रहती थी एक छोटी सी प्यारी सी फुदकु चिड़िया। रोज़ की तरह फुदकु की माँ दाने पानी की खोज में सुबह से निकली हुई थी और फुदकु घोंसले में अकेली बैठी थी। तभी उसे ख्याल आया कि क्यों न घोंसले से बाहर निकला जाये और घूमा जाये पर नही… माँ ने तो अकेले बाहर जाने से मना किया है।
तो क्या करूँ क्या करूँ ?? अच्छा ऐसा करती हूँ आसपास ही घुमूंगी ज्यादा दूर नही जाउंगी बस यही सोच कर फुदकु उड़ चली….

इधर भी, उधर भी, यहाँ भी, वहाँ भी। उड़ते उड़ते फुदकु को एक बहुत बड़ी नदी मिली। ठंडा ठंडा मीठा मीठा पानी देख कर, ज़ोर से प्यास भी लगने लगी।

फुदकु ने जा कर नदी से कहा-
सुनो सुनो ओ बहती नदिया
मै हूँ नन्ही फुदकु चिड़िया
कुछ देर को तुम रुक जाओ ज़रा।
थोड़ा सा पानी अगर
तुम मुझको दे दो इधर
मुझ पर होगा, तुम्हारा उपकार बड़ा।

नदी बोली सुनो फुदकु-
मै तो चलती ही रहती हूँ
तेज़ी से बहती रहती हूँ
मैंने रुकना कभी भी नही सीखा।
पानी जितना चाहे लो
पर रुकने को मत कहो
मै जो ठहरी, तो होगा नुक्सान बड़ा।

समझी प्यारी फुदकु …और ऐसा कह कर नदी फिर तेज़ी से बहने लगी।

तभी नदी पर पानी पीने हाथी दादा आये । फुदकु ख़ुशी से फुदक कर उनके पास पहुँची और बोली-
सुनो सुनो ओ हाथी दादा
मुझको प्यास लगी है ज्यादा
पानी सूंड में अपनी भरो थोड़ा।
फिर धीरे धीरे मुझको
पानी तुम पिला दो जो
मानूँगी उपकार तुम्हारा सदा।

हाथी दादा को नन्ही फुदकु पर तरस तो बहुत आया लेकिन वो बोले-

आं…छी!आं …छी!
मेरी प्यारी चिड़िया रानी
पिला तो देता तुमको पानी
मुझको हुआ जुखाम बहुत सारा।
थोड़ा सा पानी भी जो
तुम झूठा मेरा पी लो
हो जाओगी बीमार मेरी ही तरह।

समझी नन्ही चिड़िया और कह कर हाथी दादा भी चले गए।

अब तो फुदकु बहुत ही उदास और परेशान हो गयी। उसे परेशान देख कर पानी से नोनू मछली बाहर आई और बोली- तुम परेशान न हो फुदकु अभी चुटकी आएगी मटकी ले कर पानी भरने। बहुत अच्छी बच्ची है। उससे कहेंगे तो वो तुम्हे पानी ज़रूर पिलेगी। वो रोज़ इसी समय आती है … अभी आती ही होगी।

तभी 5 साल की चुटकी आती दिखाई दी। धीरे धीरे… थकी हुई… हाथ में बड़ी सी मटकी लिए हुए। फुदकु उड़ कर उसके पास पहुंची और बोली-
सुनो सुनो ओ प्यारी चुटकी
इतनी बड़ी सी ले कर मटकी
तुम आयी कहाँ से कहाँ को चली।
है किधर तुम्हारा घर
गली मोहल्ला और शहर
क्या तुम्हारे घर में पानी नही।

चुटकी धीरे से मुस्कुरा कर बोली –
सच यही है चिड़िया रानी
गाँव भर में नही है पानी
वहाँ प्यास से हैं बेहाल सभी।
पहले कदर नही जानी
बर्बाद किया सारा पानी
आती हूँ इतनी दूर, मिलता पानी तभी।

फुदकु बोली- ओह्ह तभी तुम इतनी थकी हुई उदास सी हो ? मै तो कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। क्या तुम मुझे थोड़ा पानी पिलाओगी ?

हाँ हाँ क्यों नही अभी पिलाती हूँ। तुरन्त ही चुटकी ने मटकी में पानी भरा और फुदकु को पिलाया। अहा ठंडा मीठा पानी पी कर जान में जान आयी।

पानी पी कर फुदकु बोली- एक बात बताओ चुटकी थोड़ी देर की प्यास से मेरा बुरा हाल हो गया। अगर ऐसा ही रहा तो गाँव के आसपास भी पानी खत्म हो जाएगा फिर क्या होगा? हम क्या करेंगे? क्या हम प्यास से मर जायेंगे ?

अचानक ही चुटकी खड़ी हुई और बोली – नही ! बिलकुल नही ! चलो फुदकु … ये बड़े कुछ नही करेंगे। इन्हें तो अपने कामों से ही फुर्सत नही। अब हम बच्चों को ही कुछ करना होगा।

फुदकु और चुटकी ने गाँव जा कर सभी बच्चों को इक्कठा किया और एक सुर में बोले-
सुनो लो राजू सुन लो गुड़िया
बात बताएं तुमको बढ़िया
पानी की कीमत सब पहचानो ज़रा।
खत्म जो हो जायेगा सब
जीना मुश्किल होगा तब
फिर न कहना हाय हमने तो कुछ न किया।

हाँ हम समझ गए …सब बच्चे एकसाथ बोले।
बेकार में पानी नही बहाएंगे।
कम पानी से काम चलाएंगे।
अगर न आज बचाया इसको
तो कल सब प्यासे मर जायेंगे।
तालाब और नदी साफ़ रखेंगे।
वर्षा का जल भी इकट्ठा करेंगे।
जल है तभी तो कल है।
बात सभी को हम समझायेंगे।

डॉ मीनाक्षी शर्मा

परिचय - डॉ मीनाक्षी शर्मा

सहायक अध्यापिका जन्म तिथि- 11/07/1975 साहिबाबाद ग़ाज़ियाबाद फोन नं -9716006178 विधा- कविता, गीत,ग़ज़लें, बाल कथा, लघुकथा