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कांवरियों का कहर

सर्वप्रथम मैं यह स्पष्ट कर देना जरूरी समझाता हूँ कि मुझे महादेव शिवशंकर में पूर्ण आस्था है और मैं भी उनकी आराधना और पूजा करता हूँ. मंदिर भी जाता हूँ और घर में भी भोलेशंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक करता हूँ. सावन मास में भोलेशंकर पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है, इस बात से भी सहमत हूँ. देश के काफी सारे श्रद्धालु अपने पास के शिवमंदिर या द्वादश ज्योतिर्लिंग में से किसी एक पर कांवरिये गंगा के पवित्र जल से जलाभिषेक करते हैं. यह परम्परा सदियों से चली आ रही है. पर इधर थोड़ा अन्धानुकरण ज्यादा ही हो गया है या यह भी एक फैशन सा बन गया है. भीड़ में शामिल होना और भीड़ के साथ हुडदंग करना. इसमें भक्तिभाव कम और आडम्बर ही ज्यादा दीखता है. हालाँकि अभी भी काफी लोग श्रद्धापूर्वक जलार्पण करते हैं और चुपचाप अपने घरों को लौट जाते हैं. पर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और दिल्ली में जो घटनाएँ घटी है उसे नकारा नहीं जा सकता. इससे हमारा हिन्दू धर्म बदनाम होता है और दूसरे भले कांवरियों को भी लोग शक की नजर से देखने लगते हैं. या तो उससे डरते हैं या नजरें बचाकर निकल जाते हैं. जबकि इनके रास्ते में सरकार तथा बहुत सारे स्वयंसेवी सस्थाएं हरसंभव मदद के लिए तैयार रहती हैं.

पहले दिल्ली, फिर बुलंदशहर, और शाहजहाँपुर के मोहम्मदी मार्ग रेलवे क्रासिंग की घटनाएँ प्रमुख हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों कांवड़ियों के हुडदंग के विडियोज छाए हुए हैं. कुछ लोग कुछ कावंड़ियों की हरकत को धर्म के अतिरेक से जोड़कर देख रहे, तो कुछ कावंड़ यात्रा पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. जबकि धर्म व्यक्तिगत मामला है.

कांवर यात्रा में बम भोले का उद्घोष करना, भजन वगैरह गाने में कुछ ग़लत या अजीब नहीं है…पुराने ज़माने में भी जब सेनाएं युद्ध के लिए जाती थीं, तो पूरे रास्ते ढोल-नगाड़े बजते थे, ताकि पैदल चलने वाले सैनिकों को थकान महसूस ना हो, गांवों में जब खेतों में रोपाई होती है तो औरतें ऊंची आवाज़ में गाने गाती हैं, ताकि काम बोझ ना महसूस हो. सच ये भी है कि घटनाओं का सिर्फ एक पक्ष नहीं होता. हो सकता है जिस गाड़ी पर कावंड़ियों ने अपना गुस्सा उतारा ग़लती उसकी भी हो, जैसा कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं. अगर ऐसा था, तो भी ये दो लोगों के बीच झगड़ा था, फिर इतने कावंड़िये क्यों हंगामे पर उतर आए? जब ये लोग गाड़ी के शीशे तोड़ रहे थे, मानसिक संतुलन खोए रोगी तरह कार पर गुस्सा उतार रहे थे तो उस वक्त क्या चल रहा होगा इन लोगों के दिमाग में? भगवान शिव का खयाल तो यकीनन नहीं होगा. धर्म और आध्यात्मिकता चित्त को शांत करती है, संयम सिखाती है, मानसिक शांति देती है…गुस्से में तमतमाए उन चेहरों को देखिए ज़रा, क्या श्रद्धा दिखती है आपको उसमें? कोई संयम, कोई भक्ति नज़र आती है?

पुलिस इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए तोड़फोड़ में शामिल एक कांवड़िये को गिरफ्तार किया है. दिल्ली का रहने वाला ये शख्स न सिर्फ नशे का आदि है, बल्कि एक शातिर चोर भी है, जो घर में चोरी के मामले में पहले भी गिरफ्तार हो चुका है. दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पुलिस को उन कांवड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया जो उपद्रव में शामिल रहते हैं और कानून अपने हाथों लेते हैं. वारदात में शामिल 26 साल के राहुल उर्फ बिल्ला नाम के इस शख्स को पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर इलाके से गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि पीड़ित लड़की की कार का साइड मिरर उसके एक साथी कांवड़िए को लग गया, जिससे उसके हाथ में खून निकल आया. इसके बाद अफवाह फैल गई कि उस कांवड़िये को बहुत पीटा गया है और उसका खून निकल रहा है. पहले तीन-चार लोगों से झगड़ा हुआ और फिर अफवाह फैलते ही कांवड़ियों के झुंड ने कार को तहस नहस कर डाला. हालांकि, गनीमत ये थी कि इस वारदात में कार सवार लड़की और उसके दोस्त को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. दोनों मौके की नजाकत को भांप गए और तोड़फोड़ शुरू होने से पहले ही घटनास्थल से निकल गए.

एक और समाचार के अनुसार शाहजहांपुर के मोहम्मदी मार्ग स्थित रेलवे गेट बंद मिलने पर कांवरियों ने जमकर उत्पात मचाया और गेट तोड़ दिया. विरोध करने पर गेटमैन की गुमटी पर पथराव भी किया. पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही कांवरिये वहां से चले गए. गेटमैन की सूचना पर आरपीएफ ने जांच शुरू कर दी है. इस घटना से रेल यातायात करीब दो घंटे  तक बाधित रहा. इन दिनों सावन महीना होने की वजह से सैकड़ों श्रद्धालु गोलाधाम कांवर लेकर जा रहे हैं. गेटमैन रामपाल ने पुलिस को बताया कि गुरुवार रात आठ बजे अप और डॉउन दोनों लाइनों से गाड़ियों को निकालने के लिए गेट बंद कर दिया गया था, जिसे खुलवाने के लिए करीब दर्जन भर कांवरिये उनकी गुमटी में घुस आए और गेट खोलने का प्रयास करने लगे. आरोप है कि मना करने पर इन कांवरियों ने एक गेट को तोड़ दिया और उनकी गुमटी पर पथराव किया.

इस बीच बुलंदशहर में 7 अगस्त को पुलिस वाहन में तोड़फोड़ करने से सिलसिले में पुलिस ने शुक्रवार को मुख्य आरोपी पप्पू समेत 6 कांवड़ियों को गिरफ्तार किया है. शिवभक्त कांवड़ियों का तांडव गुरुवार को भी जारी रहा. गुरुवार को कांवड़ियों ने बुलंदशहर में पुलिस की गाड़ी भी तोड़फ़ोड़ दी, सड़कों पर तेज़ संगीत चलाते , ट्रैफ़िक नियमों की धज्जियां उड़ाते कावड़ियें आम रहे, लेकिन कुछ कावड़ियों का यह भी कहना है कि कुछ बदमाशों की वजह से कावड़ियों का नाम ख़राब हो रहा है. ये वही पुलिस है जिसके वरिष्ठ अधिकारी हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर फूल बरसाते दिखे. लेकिन इस बीच कांवड़ियों ने सड़कों पर जो उत्पात किया उसने उन शिवभक्तों को भी लोग संदेह से देखने लगे जो पूरे भक्तिभाव से कांवड़यात्रा में शामिल रहे.

अभीतक जितनी घटनाएँ प्रकाश में आई हैं उनमे उत्तर प्रदेश का नाम ही बदनाम हुआ है, जबकि झाड़खंड के देवघर(बाबाधाम) में भी काफी लोग सुल्तानगंज से १०४ किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबाधाम में जलार्पण करते हैं. अभीतक यहाँ ऐसी कोई अप्रिय वारदात इस साल खबर ने नहीं आई है. कांवर यात्रा निर्बाध रूप से शांतिपूर्ण ढंग से जारी है. इसके लिए प्रशासन सहित सभी कांवरियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भी प्रशंसा की जानी चाहिए. शांतिपूर्ण यात्रा और शांतिपूर्वक भक्तिभाव में कोई बुराई नहीं है, आस्था के साथ मन की मुराद पूरी होती हो, मन को सुकून प्राप्त होता हो तो बहुत ही अच्छा है. धार्मिक आयोजन होने चाहिए पर भीड़ के द्वारा मदिरापान, नशा आदि का सेवन करके आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी रूप में जायज नहीं हो सकता.

अंत में मेरा स्वयं का लिखा हुआ शिव बाबा के लिए भजन –

शिव बाबा की कृपा से, सब काम हो रहा है हम माने या न माने, कल्याण हो रहा है!
खुद विष का पान करके, अमृत किया हवाले, आशीष सबको देते, विषधर गले में डाले.
तन में भभूत लिपटे, तिरसूल को सम्हाले, आये शरण में कोई, उसको गले लगा ले.
हम भक्त हैं उन्ही के, ये भान हो रहा है! हम माने या न माने कल्याण हो रहा है!
रावण भी उनको भजता, राम जी भी मानें,जब भी पड़ी जरूरत, देवों की बात माने
धारे हैं रूप कपि का, हनुमान उनको जाने,रावण की लंका पहुंचे, सीता का हाल पाने
कपी रूप में वही हैं, अब भान हो रहा है , हम माने या न माने कल्याण हो रहा है!
माता सती के मन में संशय कभी हुआ था, बाबा के मन में उस दिन, संताप ही हुआ था.
माता को त्याग मन से, प्रत्यक्ष न कुछ कहा था. पिता का यज्ञशाला, सती ने ही खुद कहा था
पूजित अन्य सुर सब, शिव अपमान हो रहा है! हम माने या न माने कल्याण हो रहा है!
डांटा सती ने पितु को, खुद को भी खूब कोसा, जीवित न मैं रहूंगी, अपने ही मन में सोचा
बलिदान की खुदी को, अग्नि में तन को झोंका,ऐसा भी कृत्य होगा, था न किसी ने सोचा!
दक्ष राज को ग्लानी, का भान हो रहा है . हम माने या न माने कल्याण हो रहा है!
शिव ने उठाया त्रिशूल, सर दक्ष का काट डाला,आई जब उन्हें दया, तब बकरे का जोड़ डाला
बालक हूँ बाबा तेरा तप क्या मैं कर सकूंगा, अंतर्मन साफ़ कर के तेरा नाम ही जपूंगा
दुखियों को दान देकर, संतुष्ट हो सकूंगा,हो ना अहित किसी का, कोशिश मैं यही करूँगा
तू सत्यम शिवम सुन्दरम, सद्ज्ञान हो रहा है. हम माने या न माने कल्याण हो रहा है!
ॐ नम: शिवाय! बम बम भोले! जय भोलेनाथ!

– जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

2 thoughts on “कांवरियों का कहर

  • जवाहर लाल सिंह

    आदरणीय सिंघल साहब, मैंने सभी कांवरियों को नहीं कहा… मैंने यही कहा है कि कुछ गलत तत्वों के चलते ही अच्छे कांवरियों को भी लोग शक की नजर से देखने लगे हैं. देवघर में अभीतक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है जबकि वहां भी प्रतिदिन लाखों कांवरिये जलार्पण कर रहे हैं. सादर!

  • विजय कुमार सिंघल

    आपका लेख अपनी जगह ठीक है, लेकिन कुछ मूर्खों के बहाने सभी कांवरियों को बदनाम करना उचित नहीं. लाखों कांवरियों में कुछ गलत तत्वों का होना स्वाभाविक है. पर ऐसी घटनाओं की संख्या नगण्य है.
    यदि इनको जगह मुसलमान होते, तो पूरा देश जल उठता. शिव भक्त कांवरिये फिर भी बहुत अनुशासित हैं. जो नहीं हैं, उन पर प्रशासन कार्यवाही कर ही रहा है.

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