प्लास्टिक की प्लास्टिक सर्जरी

आज हम आपका परिचय हमारे एक और नए सुधी पाठक-कामेंटेटर से करवा रहे हैं, जिन्होंने प्लास्टिक की प्लास्टिक सर्जरी कर दी है. वो कैसे? तनिक रुकिए, जान जाएंगे.

जैसा कि हम हमेशा से कहते आए हैं हमारे सुधी पाठक-कामेंटेटर्स अपनी अप्रतिम प्रतिक्रियाओं से जहां हमारी हौसलाअफ़ज़ाई तो करते ही हैं, हमें अपने विस्तृत ज्ञान से ज्ञानाभिभूत भी करते हैं.

अभी हाल ही में हमने एक ब्लॉग लिखा था- ”प्लास्टिक से आजादी”. यह ब्लॉग एक संक्षिप्त बाल गीत था. मलय भाई ने प्लास्टिक से आजादी क्या दिलवाई, प्लास्टिक की प्लास्टिक सर्जरी ही कर दी.

पहले मलय भाई की प्रतिक्रिया पढ़िए-

”प्लास्टिक पॉल्यूशन आज एक बेहद गंभीर विषय है तथा वन्य जन्तुओं, मानव जीवन पर इसका बेहद बुरा प्रभाव हो रहा है; परंतु अपनी खास विशेषताओं के कारण प्लास्टिक आधुनिक युग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्‍तु बन गया है. वर्षों से इस उद्योग से जुड़े होने की वजह ये जानता हूँ कि कृषि के उपकरण, परिवहन वाहन, जल-वितरण, भवन, एक्स-रे फिल्म, रक्षा उपकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों में आज प्लास्टिक बहुत उपयोगी ही नहीं, बिना विकल्प के है. आपको ये जानकर आश्‍चर्य होगा कि वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक से कृत्रिम हृदय भी बनाया है. कई जगह इसने धातु की जगह ले ली है. प्लास्टिक के न सड़ने की प्रवृत्ति ने इसे समस्या का रूप दे दिया है. अवश्यकता इस बात की है कि प्लास्टिक का सही उपयोग हो. प्लास्टिक प्रदूषण का मुख्य कारण – सस्ता और टिकाऊ प्लास्टिक बैग का उपयोग बंद हो, झंडे वगैरह भी बिल्कुल न बनाये जाएं. 50 मॅक्रॉन से कम के बैग वगैरह बंद किये जाएं और रीसाइकिलिंग को बढ़ावा दिया जाये. साथ ही साथ, री-साइकिल न हो सकने वाले प्लास्टिक का उत्पादन शीघ्र-से-शीघ्र रोका जाय.”

मलय भाई, आपकी इतनी विस्तृत प्रतिक्रिया का जवाब केवल कामेंट में नहीं, पूरे ब्लॉग में दे पाना ही संभव है. इस पर पूरा ब्लॉग इसलिए भी लिखना आवश्यक हो गया, ताकि आपकी जानकारी और जागरुकता से पूर्ण प्रतिक्रिया का लाभ अन्य अनेक पाठकों तक पहुंच सके.

मलय भाई, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. ”प्लास्टिक पॉल्यूशन आज एक बेहद गंभीर विषय है तथा वन्य जन्तुओं, मानव जीवन पर इसका बेहद बुरा प्रभाव हो रहा है.” इसके साथ ही प्लास्टिक के कारण पृथ्वी का बंजर होना, नालों-नालियों का रुक जाना, जानवरों का बेमौत मरना, अनेक बीमारियों का आमंत्रण आदि इसके गंभीर परिणाम हैं.

आपने यह भी सही कहा है, कि प्लास्टिक आधुनिक युग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ अत्यंत विनाशकारी पदार्थ भी है. यों तो इसके कारण होने वाले नुकसान के बारे में हम सब बहुत कुछ जानते हैं. लेकिन आपने बहुत अच्छी बात बताई है. प्लास्टिक के न सड़ने की प्रवृत्ति ने इसे समस्या का रूप दे दिया है.

आपने यह भी सही कहा है, कि कृषि के उपकरण, परिवहन वाहन, जल-वितरण, भवन, एक्स-रे फिल्म, रक्षा उपकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों में आज प्लास्टिक बहुत उपयोगी ही नहीं, बिना विकल्प के है. सच में इसका कोई विकल्प नहीं है, इसलिए हम लोग चाहकर भी प्लास्टिक के बिना रह पाने से डर रहे हैं. क्यों? यही तो यक्ष प्रश्न है. क्या हम पहले प्लास्टिक के बिना रहते नहीं थे? हमने तो लगभग 50 साल तक प्लास्टिक का उपयोग ही नहीं किया. अब यह घर में ऐसा प्रवेश पा गया है, कि प्लास्टिक ही प्रधान हो गया है.

इसका भी निदान आपने दे दिया- ”50 मॅक्रॉन से कम के बैग वगैरह बंद किये जाएं और रीसाइकिलिंग को बढ़ावा दिया जाये. साथ ही साथ, री-साइकिल न हो सकने वाले प्लास्टिक का उत्पादन शीघ्र-से-शीघ्र रोका जाय.”

बिलकुल सही कहा. विदेशों में री-साइकिल प्रक्रिया को प्रमुखता दी जाती है. लोग री-साइकिल के लिए प्लास्टिक बैग्स को इकट्ठा करके रखते जाते हैं और मार्केट में एक नियत मशीन में डालकर आते हैं. वहां से प्लास्टिक की री-साइकिलिंग आसान हो जाती है. इसका अर्थ यह हुआ कि व्यापारी, आम जनता और प्रशासन का मिला-जुला प्रयास प्लास्टिक के दुरुपयोग से हमें बचाता है. ऐसा ही होना चाहिए.

आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है- ”वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक से कृत्रिम हृदय भी बनाया है. कई जगह इसने धातु की जगह ले ली है.” मलय भाई, आप वर्षों से इस उद्योग से जुड़े होने की वजह से बहुत कुछ जानते हैं. कृपया विस्तार से बताएं, कि ”कैसे कई जगह इसने धातु की जगह ले ली है?” हमारे अन्य पाठक भी इस पर प्रकाश डाल सकते हैं.

आपने यह भी सही कहा- ”सस्ता और टिकाऊ प्लास्टिक बैग का उपयोग बंद हो, झंडे वगैरह भी बिल्कुल न बनाये जाएं.” अगर हम अभी से बच्चों को आजादी-पर्व पर्व पर प्लास्टिक से आजादी की उपयोगी शिक्षा देंगे, तो आगे चलकर वे अपनी अगली पीढ़ियों को इस बारे में शिक्षित कर सकेंगे.

हम आपकी इस अप्रतिम विस्तृत प्रतिक्रिया के बहुत-बहुत आभारी हैं, जिससे हमारा ज्ञानवर्द्धन भी हुआ और आगे भी इस पर चर्चा कर सकने की संभावनाएं विकसित हुईं. हमारे विचार से एक कुशल चिकित्स्क की भांति आपकी यह प्लास्टिक की प्लास्टिक सर्जरी सफल साबित हुई है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।